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Wednesday, June 10, 2026

आयुष्मान में ‘इलाज’ या ‘इलाज का खेल’? यूपी में 200 अस्पतालों पर कार्रवाई ने उठाए बड़े सवाल

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– भुगतान रोक, निलंबन और पोर्टल गड़बड़ी?
– क्या यह सिस्टम की सफाई है या मरीजों के भरोसे पर चोट?

अनुराग तिवारी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत सामने आई गड़बड़ियों पर सरकार की सख्त कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना जमीनी स्तर पर अपने उद्देश्य को पूरा कर पा रही है या नहीं। लगभग 200 अस्पतालों पर कार्रवाई, 100 के भुगतान पर रोक और करीब 100 अस्पतालों को योजना से निलंबित करना—ये आंकड़े सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सिस्टम में गहरी खामियों का संकेत हैं।
सरकार का तर्क साफ है—जिन अस्पतालों ने मानकों का पालन नहीं किया, या जिनकी सेवाएं संदिग्ध पाई गईं, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी। लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में अस्पताल मानकों पर खरे क्यों नहीं उतर पाए? क्या यह केवल अस्पतालों की लापरवाही है, या निगरानी और क्रियान्वयन की व्यवस्था पहले से ही कमजोर थी?
ई-आईएम 2.0 पोर्टल की गड़बड़ी—तकनीक या बहाना? कार्रवाई का एक प्रमुख कारण अस्पतालों का ई-आईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट न होना बताया जा रहा है। डिजिटल सिस्टम पारदर्शिता लाने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन अगर वही सिस्टम समय पर सुचारु रूप से लागू न हो, तो यह अस्पतालों और मरीजों दोनों के लिए समस्या बन जाता है। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि तकनीकी खामियों की जिम्मेदारी किसकी है—अस्पतालों की या सिस्टम डिजाइन करने वालों की?
सबसे बड़ा सवाल—मरीज कहां जाए? कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा नुकसान उस गरीब मरीज का है, जिसके लिए आयुष्मान योजना जीवन रेखा है। जब एक साथ बड़ी संख्या में अस्पतालों का भुगतान रुकता है या वे निलंबित होते हैं, तो मरीजों के सामने इलाज का संकट खड़ा हो जाता है। क्या सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की है? या फिर यह मान लिया गया है कि सिस्टम की सफाई के दौरान कुछ लोगों का नुकसान ‘स्वाभाविक’ है?
सख्ती जरूरी, लेकिन संतुलन भी
यह मानने में कोई संकोच नहीं कि फर्जीवाड़ा, बिलिंग घोटाले और बिना इलाज के क्लेम जैसी शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सख्त कार्रवाई स्वागतयोग्य है। लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि कार्रवाई पारदर्शी, चरणबद्ध और मरीजों के हितों को ध्यान में रखकर की जाए।
आगे का रास्ता क्या?
अस्पतालों के लिए स्पष्ट और समयबद्ध गाइडलाइन
तकनीकी सिस्टम (पोर्टल) को मजबूत और सरल बनाना
मरीजों के लिए वैकल्पिक अस्पतालों की सूची और हेल्पलाइन
नियमित ऑडिट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग दोषी अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई, लेकिन ईमानदार संस्थानों को प्रोत्साहन। आयुष्मान भारत योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों के लिए जीवन की सुरक्षा है। ऐसे में यदि इसमें गड़बड़ी होती है, तो उसका असर सीधे जनता के विश्वास पर पड़ता है। उत्तर प्रदेश में हुई यह कार्रवाई एक अवसर भी है—सिस्टम को दुरुस्त करने का। लेकिन यह तभी सफल होगी, जब सुधार के साथ संवेदनशीलता और जवाबदेही भी जुड़ी हो।

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