उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने शनिवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रदेशभर के राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत 230 प्रवक्ताओं के तबादले कर दिए। विभाग की ओर से जारी सूची में जरूरत और छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की नई तैनाती की गई है। लंबे समय से कई कॉलेजों में शिक्षकों की कमी और असंतुलित तैनाती की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद शासन ने यह कदम उठाया है। तबादला सूची जारी होने के साथ ही शिक्षकों को तत्काल नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने को लेकर राज्यपाल Anandiben Patel लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में कॉलेजों के निरीक्षण, समीक्षा बैठकें और विशेष अभियान चलाए गए। इसी दौरान यह मामला भी सामने आया कि कई महाविद्यालयों में आवश्यकता के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ कॉलेजों में अपेक्षाकृत अधिक शिक्षक तैनात हैं। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने पहले सभी शिक्षकों की संबद्धता निरस्त की और अब बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं।
तबादला सूची में कम छात्र संख्या वाले रायबरेली जिले के निहस्था राजकीय महाविद्यालय से चार शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। वहीं सोनभद्र जिले के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में करीब आधा दर्जन शिक्षकों की नई तैनाती की गई है। हालांकि लखीमपुर खीरी के कुछ ऐसे कॉलेज, जहां छात्र संख्या अच्छी बताई जा रही है, वहां अब भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी आगे भी कुछ और समायोजन किए जा सकते हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादले के बाद किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। शासन का उद्देश्य प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना बताया जा रहा है।


