रिश्वत के आरोप से अभिरक्षा से फरारी तक हड़कंप
पांच पुलिसकर्मी निलंबित
सवाल—क्या हर चूक का जवाब सिर्फ निलंबन
यूथ इंडिया | कन्नौज
कन्नौज। जिले में कुछ ही दिनों के भीतर पुलिस महकमे से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आने से कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक मामले में समझौते के बाद 10 हजार रुपये मांगने का कथित ऑडियो वायरल हुआ, जबकि दो मामलों में पुलिस अभिरक्षा से आरोपी फरार हो गए। तीनों घटनाओं में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
समझौते के बाद 10 हजार रुपये मांगने का आरोप
ठठिया थाना क्षेत्र की सुरसी चौकी पर तैनात सिपाही ध्रुव कुमार यादव पर समझौता कराने के बाद 10 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। कथित ऑडियो वायरल होने के बाद एसपी विनोद कुमार ने उसे निलंबित कर दिया।
कछियाना गांव निवासी राहुल कुशवाह का आरोप है कि 27 मई को उसके पिता और हापुड़ निवासी महिला के बीच लेनदेन विवाद में चौकी पर समझौता कराया गया था। इसके बाद सिपाही ने 10 हजार रुपये मांगे। आरोप है कि दबाव में पांच हजार रुपये दे दिए गए। शेष रकम के लिए 18 अगस्त को घर पहुंचकर दबाव बनाने का भी आरोप है। पीड़ित ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन कानपुर में शिकायत की बात कही है। मामले की जांच जारी है।
दो महिला आरोपी अभिरक्षा से फरार
गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र में चेन चोरी की दो महिला आरोपी पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गईं। ड्यूटी पर तैनात महिला आरक्षी साक्षी और उमा को प्रथमदृष्टया लापरवाही का दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है।
बताया गया कि फर्रुखाबाद के अचरा क्षेत्र की प्रियंका यादव ने टेंपो में सोने की चेन चोरी की शिकायत की थी। पुलिस ने दोनों संदिग्ध महिलाओं को गिरफ्तार किया, लेकिन पूछताछ और कार्रवाई के दौरान वे पुलिस को चकमा देकर फरार हो गईं। बाद में पुलिस ने दोनों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया। मामले की विभागीय जांच सीओ सिटी शिल्पा वर्मा को सौंपी गई है।
पोक्सो आरोपी भी पुलिस को चकमा देकर भागा
सौरिख थाना क्षेत्र में पोक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में वांछित 25 वर्षीय अंशुल पुत्र पन्नालाल पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया। बताया गया कि आरोपी ने दस्त और शौच का बहाना बनाया और पुलिसकर्मियों को चकमा देकर भाग निकला।
घटना के बाद एसपी ने आरक्षी मोरध्वज और लोकेश पाठक को निलंबित कर दिया। मामले की जांच सीओ तिर्वा को सौंपी गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। अंशुल के खिलाफ मुकदमा संख्या 334/2026 में बीएनएस की धाराओं के साथ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है।
निलंबन से आगे कब तय होगी जवाबदेही?
लगातार तीन घटनाओं ने कन्नौज पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अपराधियों पर सख्ती और जीरो टॉलरेंस का दावा करती है, लेकिन अभिरक्षा से आरोपियों का फरार होना सुरक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ी को उजागर करता है।
सवाल यह है कि पुलिस की निगरानी में आरोपी इतनी आसानी से कैसे भाग जाते हैं? क्या ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की पर्याप्त निगरानी नहीं होती? और क्या हर चूक के बाद निलंबन ही अंतिम कार्रवाई है


