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Wednesday, June 10, 2026

सीएचसी कमालगंज में शुरू हुई कंप्यूटरीकृत पर्ची व्यवस्था, मरीजों को मिलेगी तेज और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवा

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फर्रुखाबाद। जनपद के कमालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बुधवार से कंप्यूटरीकृत पर्ची व्यवस्था लागू कर दी गई। नई व्यवस्था के तहत अब मरीजों का पंजीकरण और ओपीडी पर्चे ऑनलाइन तैयार किए जा रहे हैं, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सुविधाजनक बन सकेगी।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार कंप्यूटरीकृत पर्ची व्यवस्था लागू होने से मरीजों का पूरा चिकित्सा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इससे चिकित्सकों को मरीजों के उपचार संबंधी पुराने विवरण आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे और बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही पर्ची बनाने में लगने वाला समय भी कम होगा, जिससे मरीजों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी।

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुरूप अस्पताल में डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर, त्वरित और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। इस व्यवस्था के माध्यम से अस्पताल में आने वाले मरीजों का डेटा व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर उनकी चिकित्सा संबंधी जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।

उन्होंने बताया कि मरीज अब ऑनलाइन माध्यम से भी अपना पंजीकरण कराकर ओपीडी पर्चा बनवा सकेंगे, जिससे अस्पताल पहुंचने पर उन्हें अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। इसके अलावा भविष्य में जांच, दवा वितरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।

सीएचसी कमालगंज में शुरू की गई यह व्यवस्था केंद्र और प्रदेश सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान तथा स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों ने नई व्यवस्था का स्वागत करते हुए कहा कि इससे समय की बचत होगी और स्वास्थ्य सेवाएं पहले की अपेक्षा अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनेंगी।

अस्पताल प्रशासन का मानना है कि डिजिटल पर्ची व्यवस्था लागू होने से न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य विभाग को भी रिकॉर्ड प्रबंधन और सेवाओं की निगरानी में काफी मदद मिलेगी। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलेगा।

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