– लेखपालों द्वारा अभिलेखों में हेरफेर कर पार्क की जमीन पर नाम चढ़ाने का आरोप
– डीएम से एफआईआर की मांग
फर्रुखाबाद। सरकारी भूमि पर अभिलेखों मे हेरफेर कर कब्जे के मामले मे जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर राठौर से रामपाल यादव मंगलवार को फिर शिकायत की है। आरोप है कि पार्क व पुस्तकालय के लिए दर्ज जमीन को निजी नामों में दर्ज कराने का आरोप लगाया गया है। मामले में सीधे-सीधे तहसील कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल दागे गए हैं।
पीड़ित रामपाल जाटव निवासी अमेठी जदीद, थाना कादरीगेट ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गाटा संख्या 374मि, रकबा 0.1300 हेक्टेयर, जो कि बाग लखौला परगना पहाड़, तहसील सदर में स्थित है और राजस्व अभिलेखों में “अंबेडकर पार्क/पुस्तकालय” के रूप में दर्ज है, उसे धोखाधड़ी और कूट रचना के जरिए निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया।
शिकायत में साफ कहा गया है कि कंचन त्रिपाठी पत्नी सतीश चंद्र निवासी नगला दीना व शकुंतला पत्नी रमेश चंद्र निवासी मोहल्ला मित्तूकुंचा ने मिलकर यह खेल रचा। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में फर्जी तरीके से नाम अंकित कराकर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा भी कर लिया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत में राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया गया है। दस्तावेजों के अनुसार, गाटा संख्या 374मि से संबंधित खतौनियों (1403-1408, 1409-1414, 1415-1420) और चकबंदी अभिलेखों (अंतर्गत गाटा 41, 45) में हेरफेर कर नाम चढ़ाने का दावा किया गया है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि शकुंतला की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके पुत्र प्रमोद कुमार शुक्ला लेखपाल द्वारा उक्त भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। वहीं, कंचन त्रिपाठी का नाम भी कथित रूप से फर्जी आधार पर दर्ज कराया गया है।
गंभीर आरोप यह भी है कि तत्कालीन लेखपाल अशोक कुमार त्रिपाठी और प्रमोद कुमार शुक्ला ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पूरे मामले को अंजाम दिया। यह पूरा मामला साजिश और संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जिसमें सरकारी जमीन को निजी संपत्ति में बदलने का प्रयास किया गया।
प्रार्थी के अनुसार, 4 अप्रैल 2026 को तहसील दिवस में भी यह मामला उठाया गया था। उस समय राजस्व टीम गठित कर जांच के आदेश दिए गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। उल्टा, जांच के नाम पर मामले को दबाने की आशंका जताई जा रही है।
अब पीड़ित ने जिलाधिकारी से सीधे मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित आरोपियों के खिलाफ थाना कादरीगेट में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
सरकारी जमीन पर कब्जे का बड़ा खेल!


