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Friday, May 22, 2026

लोहे की बाड़ बनी जानलेवा: फसल बचाने के चक्कर में गौवंश घायल, जिम्मेदारों की अनदेखी पर उठे सवाल

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शमशाबाद, फर्रुखाबाद। गंगा कटरी क्षेत्र में आवारा गोवंशों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। ताजा मामला एक गाय के गंभीर रूप से घायल होने का सामने आया है, जो फसल सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की कंटीली बाड़ में फंस गई। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और नजारा देख हर किसी का दिल दहल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इन दिनों कटरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवारा गोवंश इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं। भीषण गर्मी और भोजन की कमी के चलते ये बेजुबान जानवर खेतों की ओर रुख कर रहे हैं। किसान फसलों को बचाने के लिए लोहे की कंटीली बाड़ लगा रहे हैं, लेकिन यही बाड़ अब इन जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
बताया जाता है कि उक्त गाय भी भूख से मजबूर होकर खेत में घुस गई थी। आशंका है कि किसानों द्वारा दौड़ाए जाने पर वह जान बचाने के लिए भागी और इसी दौरान कंटीली तारों में उलझकर बुरी तरह घायल हो गई। उसके शरीर पर गहरे जख्म हो गए और वह दर्द से तड़पती रही।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। आए दिन इसी तरह कई गौवंश इन बाड़ों में फंसकर घायल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों से लेकर कस्बों तक आवारा गोवंशों की भरमार है, लेकिन इनके संरक्षण के लिए बनाए गए गौशालाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
घटना की सूचना कुछ लोगों ने संबंधित जिम्मेदारों को दी, जबकि कुछ ने पशु चिकित्सालय फैजबाग शमशाबाद को भी अवगत कराया। जानकारी के अनुसार, पशु चिकित्सक ने कर्मचारियों को भेजकर उपचार कराने की बात कही, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा था, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा गौशालाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिन गौवंशों को कभी किसान अपने परिवार का सहारा मानते थे, आज वही बेसहारा होकर सड़कों और खेतों में भटकने को मजबूर हैं।
लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए और घायल गौवंशों के इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही आवारा गोवंशों के लिए प्रभावी प्रबंधन किया जाए, ताकि न तो किसानों की फसलें बर्बाद हों और न ही बेजुबान जानवर इस तरह दर्दनाक हादसों का शिकार बनें।
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े

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