नई दिल्ली। भारत अब केवल दुनिया की नई तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उन्हें विकसित करने और नेतृत्व देने वाले देशों की श्रेणी में तेजी से शामिल हो रहा है। इसी दिशा में देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन एक ऐतिहासिक उपलब्धि बनकर उभरी है, जिसे आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा क्रांति का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भाजपा सरकार के नेतृत्व में भारत तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन इसका सशक्त उदाहरण है, जो आधुनिक तकनीक, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने का काम करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन ट्रेनें पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल होती हैं। इनसे कार्बन उत्सर्जन नगण्य होता है और प्रदूषण में कमी आती है। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देश तेजी से हाइड्रोजन आधारित परिवहन प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं और अब भारत भी इस दौड़ में अग्रणी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत विकसित की गई यह ट्रेन देश में स्वदेशी तकनीक और इंजीनियरिंग क्षमता का भी प्रदर्शन करेगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल रेलवे के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी, बल्कि ग्रीन एनर्जी मिशन को भी मजबूती मिलेगी।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में वंदे भारत ट्रेन, सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, समर्पित माल गलियारे और रेलवे विद्युतीकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। हाइड्रोजन ट्रेन को इसी श्रृंखला की अगली बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


