नई दिल्ली
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी टकराव के बीच भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे, जहां अबू धाबी में भारत-UAE-फ्रांस त्रिपक्षीय बैठक आयोजित हुई। इस अहम बैठक में यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी और फ्रांस के विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएंस भी शामिल हुए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष तकनीक और सांस्कृतिक विरासत जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। तीनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि त्रिपक्षीय साझेदारी को व्यवस्थित और दीर्घकालिक ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
बैठक के दौरान भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय संबंधों की भी समीक्षा की गई। दोनों देशों ने मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों, वैश्विक चुनौतियों और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करते हुए सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशने पर जोर दिया। भारत और यूएई के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फुजैरा में हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए यूएई के साथ एकजुटता जताई थी। पीएम मोदी ने कहा था कि आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है और सभी विवादों का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया था।
अबू धाबी में हुई यह त्रिपक्षीय बैठक ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे में भारत, फ्रांस और यूएई के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


