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Friday, October 16, 2026

भोजपुर में गंगा ने छीनी 14 साल की गुलशन की जिंदगी, 30 घंटे बाद 15 KM दूर मिला शव

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घर में मातम, रो-रोकर बुरा हाल है मां नेमा का, पिता बोले – आठ बच्चों में तीसरे नंबर की थी मेरी बेटी

कमालगंज संवाददाता।
गंगा एक बार फिर भोजपुर के लिए काल बन गई। गुरुवार सुबह गंगा में डूबी 14 वर्षीय किशोरी का शव लगभग 30 घंटे बाद घटनास्थल से 15 किलोमीटर दूर बरामद हुआ है। शव मिलते ही गांव में कोहराम मच गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

गुरुवार को पतेल लेने गई थी तीनों भाई-बहन
मृतका की पहचान गुलशन पुत्री विनोद निवासी भोजपुर के रूप में हुई है। पिता विनोद के अनुसार गुलशन कक्षा 8 की छात्रा थी। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे वह अपने दो भाइयों रोहित और अनुराग के साथ गंगा पार पतेल लेने गई थी।

वहीं गर्मी के चलते तीनों गंगा में नहाने लगे। नहाते-नहाते तीनों अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। बड़े भाई रोहित ने किसी तरह हिम्मत दिखाकर छोटे भाई अनुराग को तो बचा लिया, लेकिन बहन गुलशन को नहीं बचा सका। देखते ही देखते तेज धार गुलशन को बहा ले गई।

112 और भोजपुर चौकी पुलिस के बाद NDRF तक बुलाई गई
सूचना मिलते ही डायल 112 और भोजपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष राम सहाय सिंह ने घटना स्थल का निरीक्षण कर पंचाल घाट से गोताखोरों और स्टीमर को बुलाया। ग्रामीणों ने भी देर शाम तक तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

जब स्थानीय स्तर पर कोई सुराग नहीं लगा तो शुक्रवार को गाजियाबाद से NDRF की 30 सदस्यीय टीम को बुलाया गया। टीम ने करीब 25 घंटे तक सघन सर्च ऑपरेशन चलाया।

इंस्पेक्टर भीम सिंह ने बताया कि तलाश के दौरान किशोरी का शव कमालगंज पुल के पास मिट्टी में दबा हुआ मिला। शव घटनास्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर बहकर पहुंच गया था।

विनोद के आठ बच्चे हैं, गुलशन तीसरे नंबर की बेटी थी। उसकी मौत की खबर से मां नेमा बेसुध है। गांव की महिलाएं उसे संभाले हुए हैं।

परिजन पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पंचायतनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

यह हादसा नहीं, चेतावनी थी
भोजपुर घाट पर यह कोई पहला हादसा नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार यहां पहले भी कई लोग डूब चुके हैं। इसके बावजूद न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा है, न बैरिकेडिंग है और न ही स्थाई तौर पर गोताखोर या नाव की व्यवस्था है। हर बार हादसे के बाद ही पंचाल घाट से गोताखोर बुलाए जाते हैं।

सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है?

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