नई दिल्ली: दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। शुक्रवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें 10 दिन की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। अदालत ने 10 अक्टूबर को ताहिर हुसैन को दंगा करने और अपराध के लिए उकसाने व सहायता देने के आरोप में दोषी ठहराया था।
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होने के नाते ताहिर हुसैन की जिम्मेदारी इलाके में शांति और सद्भाव बनाए रखने की थी। इसके विपरीत, उन्होंने अपनी स्थिति का इस्तेमाल हिंसा में मदद करने के लिए किया।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “जो हाथ मार्गदर्शन करता है, वह हमला करने वाले हाथ जितना ही, या उससे भी अधिक दोषी है।” कोर्ट के मुताबिक, हिंसा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होने का तर्क किसी व्यक्ति को उसकी अन्य भूमिकाओं की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, खजूरी खास और करावल नगर रोड पर हुई हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन का घर अहम केंद्र बना था। आरोप था कि उन्होंने दंगाइयों को अपने घर में पनाह दी और छत उपलब्ध कराई, जहां से भीड़ ने आम लोगों पर पत्थरों और अन्य वस्तुओं से हमला किया। अदालत ने इस मामले में बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि ताहिर हुसैन दंगाइयों की भीड़ में शामिल नहीं थे और भीड़ ने उनके घर पर जबरन कब्जा कर लिया था। हालांकि, अदालत ने कहा कि इस दावे के समर्थन में पुलिस नियंत्रण कक्ष (PCR) को की गई कॉल का कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। घर पर जबरन कब्जे की कोई आधिकारिक शिकायत भी दर्ज नहीं थी।
अदालत के अनुसार, ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट में उनकी मासिक आय करीब दो लाख रुपये और चार आश्रित सदस्यों का उल्लेख है। उनके खिलाफ पहले से नौ मामले दर्ज होने की जानकारी भी दी गई। अदालत ने उन्हें जेल में बिताई गई अवधि का लाभ देने का निर्देश दिया है।


