हरदोई जिले में गैर इरादतन हत्या के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता कौशिक ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पति मंशाराम को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
मामला वर्ष 2020 का है, जब आरोपी ने अपनी पत्नी सुनीता को घरेलू विवाद के दौरान ईंट और लाठी-डंडों से गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घटना के बाद घायल महिला को पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ रेफर किया गया, जहां 27 अगस्त 2020 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के संबंध में मृतका के पिता शिवनाथ, निवासी रामापुर रहोलिया (बेहटा गोकुल क्षेत्र), ने 26 अगस्त 2020 को हरियावां थाने में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की शादी वर्ष 2005 में मंशाराम से हुई थी और शादी के बाद से ही वह उसे प्रताड़ित करता था तथा आए दिन मारपीट करता था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चंदन कुमार ने नौ गवाहों को अदालत में पेश किया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा जैसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि समाज में ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके। मृतका अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गई है, जिनका पालन-पोषण अब परिवार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति हिंसा के खिलाफ एक सख्त संदेश भी देता है।


