मानव सेवा संघ आश्रम प्रकरण में कथित अवैध कब्जे, फर्जी वसीयत और संरक्षण के आरोपों से जुड़ा मामला
प्रयागराज/मथुरा। वृंदावन के मानव सेवा संघ आश्रम से जुड़े कथित अवैध कब्जे, फर्जी वसीयत, अतिक्रमण और भ्रष्ट अधिकारियों एवं भूमाफियाओं को संरक्षण देने के आरोपों से संबंधित याचिका पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई कोर्ट संख्या-55 में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
याचिका सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन के पीठाधीश्वर एवं कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना पर आरोप लगाया गया है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के चलते कथित अवैध कब्जाधारियों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सोमवार को हाईकोर्ट में मामले पर दो घंटे से अधिक समय तक बहस चली। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रीना एन. सिंह तथा अधिवक्ता सतेंद्र सिंह ने पक्ष रखा। वहीं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना एवं शासन की ओर से अपर महाधिवक्ता समेत अन्य अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आश्रम की संपत्ति, कथित फर्जी वसीयत, अतिक्रमण, प्रशासनिक कार्रवाई और मामले की जांच से जुड़े विभिन्न तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया।
यह विवाद पहले मथुरा की विशेष एमपी-एमएलए अदालत तक पहुंचा था। अप्रैल 2025 में अदालत ने याचिका पर सुनवाई स्वीकार करते हुए वृंदावन कोतवाली पुलिस से रिपोर्ट तलब की थी। उस समय प्रकाशित रिपोर्टों में भी याचिकाकर्ता की ओर से वित्त मंत्री सुरेश खन्ना पर कथित अवैध कब्जाधारियों और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
बाद की कार्यवाही में पुलिस रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा था। मई 2025 में इसी प्रकरण से जुड़े पक्षकार के साथ अदालत परिसर में कथित मारपीट की घटना की खबरें भी सामने आई थीं।
बाद में मथुरा की अदालत से मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। फरवरी 2026 की प्रकाशित रिपोर्टों में भी मानव सेवा संघ आश्रम से संबंधित कथित फर्जी वसीयत, अवैध कब्जे और संरक्षण के आरोपों वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई का उल्लेख किया गया था।
सोमवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में न्यायालय के अगले आदेश पर निगाहें टिकी हैं। आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा कि याचिका पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है और जांच अथवा अन्य राहत के संबंध में न्यायालय क्या दिशा-निर्देश देता है।


