वॉशिंगटन। अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीय तकनीकी कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा पर प्रति आवेदन 1,03,265 डॉलर यानी करीब 98 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस लगाने का प्रस्ताव जारी किया है। नया नियम लागू होने पर अमेरिका में नौकरी के लिए एच-1बी वीजा हासिल करना पहले के मुकाबले बेहद महंगा हो जाएगा।
एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से उच्च कौशल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं। अभी सामान्य तौर पर एच-1बी वीजा प्रक्रिया में करीब 2,000 से 5,000 डॉलर तक शुल्क लगता है। प्रस्तावित नई फीस इससे कई गुना अधिक है।
भारतीयों पर सीधा असर
एच-1बी वीजा का सबसे अधिक इस्तेमाल भारतीय तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के पेशेवर करते हैं। ऐसे में नई फीस लागू होने पर भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों और तकनीकी कंपनियों पर बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है। कंपनियों के लिए भी विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका बुलाना महंगा हो जाएगा।
पहले भी अदालत में चुनौती
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल अस्थायी आदेश के जरिए यह फीस लागू की थी। जून में अमेरिकी संघीय अदालत ने इसे गैरकानूनी बताते हुए सरकार को फीस वसूलने से रोक दिया था। फिलहाल मामले की न्यायिक समीक्षा जारी है। इसके बावजूद अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने अब इस शुल्क को स्थायी रूप देने की दिशा में नया प्रस्ताव जारी किया है।
30 दिन तक मांगी जाएगी राय
गृह सुरक्षा विभाग का प्रस्ताव मंगलवार को संघीय रजिस्टर में औपचारिक रूप से प्रकाशित होगा। इसके बाद आम लोगों, कंपनियों और संगठनों को प्रस्ताव पर 30 दिन तक अपनी आपत्तियां और सुझाव देने का मौका मिलेगा।
पिछले साल एच-1बी वीजा के लिए करीब 3.44 लाख पंजीकरण हुए थे, जो 2024 की तुलना में 25 फीसदी से ज्यादा कम थे। सरकार वीजा चयन प्रक्रिया में अधिक कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी बदलाव प्रस्तावित कर रही है।
प्रस्ताव लागू हुआ तो अमेरिका में भारतीय तकनीकी पेशेवरों की लागत बढ़ने के साथ कंपनियों की भर्ती नीति पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।


