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Wednesday, April 22, 2026

वाटर लाइन कार्य में भारी लापरवाही, पार्षदों का फूटा गुस्सा — मंत्री से शिकायत की तैयारी

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शाहजहाँपुर।अमृत योजना-2 के अंतर्गत जल निगम द्वारा शहर में कराए जा रहे वाटर लाइन बिछाने के कार्य में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर नगर निगम के पार्षद अब खुलकर विरोध में उतर आए हैं। मंगलवार को आयोजित आपात बैठक में पार्षदों ने संबंधित फर्म की कार्यशैली पर तीखा रोष जताते हुए साफ कर दिया कि अब यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मामले को लेकर माननीय मंत्री से मुलाकात कर दोषी फर्म और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
पार्षदों का आरोप है कि वाटर लाइन बिछाने के नाम पर पूरे शहर की गलियों को महीनों से खोदकर छोड़ दिया गया है। अधूरे कार्य के चलते राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना हादसों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद कार्य में कोई तेजी नहीं लाई जा रही।

पार्षद शिवओम सक्सेना ने कहा कि फर्म की मनमानी अब चरम पर पहुंच चुकी है और इसे किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। वहीं, रामबरन सिंह चंदेल ने बताया कि उनके वार्ड-53 की सिन्हा वाली गली 12 मार्च से खुदी पड़ी है, लेकिन अब तक कार्य पूरा नहीं हुआ। उन्होंने पाइपलाइन की गहराई पर भी सवाल उठाते हुए तकनीकी जांच की मांग की।

लालू पुजारी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो फर्म के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद कार्य की गति नहीं बढ़ रही है, जिससे जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

विपिन यादव ने कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि फर्म द्वारा बेहद घटिया स्तर का काम कराया जा रहा है। उन्होंने संबंधित अभियंताओं की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि न तो तकनीकी समझ दिख रही है और न ही अनुभव।

वहीं, रुपेश वर्मा ने बताया कि उनके वार्ड में सभी कार्य अधूरे पड़े हैं और बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द काम पूरा नहीं हुआ तो बरसात में हालात और भी बदतर हो जाएंगे।

राजेश गंगवार ने कहा कि फर्म की हठधर्मिता अब बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की मंशा के विपरीत कार्य किया जा रहा है और जनता के पैसे की खुली बर्बादी हो रही है।

पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उच्च स्तर पर शिकायत कर फर्म को ब्लैकलिस्ट कराने की मांग की जाएगी।
निष्कर्ष:

शहर में चल रहे वाटर लाइन कार्य को लेकर बढ़ते असंतोष ने अब जनप्रतिनिधियों को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, यदि जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते सुधार नहीं किया।

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