
– जांच में खुला “धर्मार्थ” के नाम पर निजी खेल
– डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने की कार्रवाई
– विधायक सुशील शाक्य ने की थी शासन में शिकायत
– डॉ जाकिर हुसैन ट्रस्ट का मामला
लखनऊ /फर्रुखाबाद। पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन ट्रस्ट की पट्टे पर आवंटित सरकारी जमीन पर “धर्मार्थ” के नाम पर खेल का बड़ा खुलासा करते हुए सरकार ने जांच के बाद निजी हितों में उपयोग पाए जाने के चलते जमीन छीन ली जिससे वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद को बड़ा झटका लगा है। स्वास्थ्य मंत्री और राज्य के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने विधायक सुशील शाक्य की शिकायत पर जांच के बाद यह बड़ा निर्णय लिया।
जिले के कस्बा नवाबगंज में स्थित 25 एकड़ की बेशकीमती स्वास्थ्य विभाग की जमीन, जो वर्ष 1995 में धर्मार्थ चिकित्सालय के नाम पर दी गई थी, जिसके अनुच्छेद प्रयोग की शिकायत कायमगंज विधायक सुशील शाक्य ने सरकार से की थी जिसमें जांच के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी और डीएम फर्रुखाबाद की रिपोर्ट शान पहुंचते ही सरकार ने पट्टा निरस्त कर वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी । इस पूरे मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद से जुड़े ट्रस्ट “डॉ. जाकिर हुसैन ट्रस्ट” का नाम सामने आने से सियासी भूचाल आ गया है।
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, गाटा संख्या 1625 की लगभग 25 एकड़ भूमि 01 अप्रैल 1995 को 30 वर्षों की शर्त पर दी गई थी। शर्त साफ थी, कि निर्धारित समय सीमा में धर्मार्थ अस्पताल का निर्माण और संचालन। लेकिन जांच में जो सामने आया, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 01 अप्रैल 2025 तक अस्पताल का निर्माण तक नहीं हुआ। इतना ही नहीं, जमीन का उपयोग कथित रूप से निजी लाभ के लिए किया जाता रहा। नियमों के उल्लंघन के बावजूद वर्षों तक कार्रवाई न होना अपने आप में प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
भाजपा विधायक सुशील कुमार शाक्य की शिकायत के बाद उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए जांच के आदेश दिए थे ।
13 मई 2025 को 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी, अपर जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी शामिल थे। 30 मई 2025 को स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखीय जांच पूरी की गई। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि ट्रस्ट ने न तो शर्तों का पालन किया और न ही तय अवधि 30 वर्षों में कोई स्वास्थ्य सुविधा खड़ी की।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि 30 साल की अवधि पूरी होने के बाद भी जमीन पर कब्जा बनाए रखा गया और नियमों की अनदेखी कर उपयोग जारी रहा। इसके बाद नियम-51 के तहत 19 फरवरी 2026 को नोटिस जारी किया गया और अंततः पट्टा निरस्त करने की संस्तुति कर दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है, जिससे यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित कब्जे का संकेत देता है।
यहां यह भी बताना जरूरी है की संवैधानिक तौर पर किसी भी ट्रस्ट अथवा स्वंम सेवी संस्था को किसी भी कार्य के लिए सरकारी भूमि का आवंटन नहीं किया जा सकता उसके बावजूद एक ही दिन में सलमान खुर्शीद के प्रभाव में यह ग्राम समाज की जमीन मोहम्मदाबाद के मुस्लिम व्यक्ति को वृक्षारोपण के लिए जमीन दी गई थी उसका पट्टा निरस्त कर उसी दिन यह जमीन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित की थी।आश्चर्यजनक बात है कि उसी दिन स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक कानपुर ने नियम विरुद्ध तरीके से यह जमीन डॉक्टर जाकिर हुसैन ट्रस्ट को आवंटित की थी। जबकि अपने निर्देशक को भूमि आवंटन का कोई अधिकार भी नहीं होता है। ट्रस्ट ने आवंटन पाने के बाद उसे पर लगे लाखों के शीशम और तमाम पेड़ भी चंद महीनों में कटवा डाले थे।
विधायक सुशील शाक्य ने बताया कि जमीन सरकार के पक्ष में आने के बाद उसे पर जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षण संस्थाओं को स्थापित किया जाएगा, इस मामले में जब पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद से बात की गई तो उन्होंने कोई भी जानकारी न होने की बात कही।


