25 C
Lucknow
Saturday, May 30, 2026

गौशालाओं में फिर बदहाल व्यवस्था! तपती धूप में तड़प रहे गोवंश, सीएम के आदेश भी बेअसर

Must read

 

– चारे, पानी और छाया के इंतजाम पर सवाल, करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं सुधर रही तस्वीर

फर्रुखाबाद। प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण के लिए लगातार बजट बढ़ाने और मुख्यमंत्री द्वारा नियमित समीक्षा किए जाने के बावजूद जनपद की कई गौशालाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भीषण गर्मी और 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचते तापमान के बीच गौशालाओं में गोवंशों के लिए पर्याप्त छाया, स्वच्छ पानी और हरे चारे की व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है।
जनपद की विभिन्न अस्थायी और स्थायी गौशालाओं में हजारों गोवंश संरक्षित होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हालात इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई स्थानों पर गोवंश खुले आसमान के नीचे खड़े दिखाई दे रहे हैं, जहां उन्हें भीषण धूप से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। दोपहर के समय टीन शेड भी भट्टी की तरह तपते नजर आते हैं।
प्रदेश सरकार हर वर्ष गोवंश संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। गोशालाओं के संचालन, चारा, भूसा, पानी, चिकित्सा और रखरखाव के लिए अलग-अलग मदों में धनराशि जारी की जाती है। इसके बावजूद यदि गोवंशों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गर्मी के मौसम में गौशालाओं में स्वच्छ पेयजल, हरे चारे, कूलर, फॉगिंग और पर्याप्त छायादार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लेकिन जनपद की कई गौशालाओं में इन निर्देशों का असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि कई गौशालाओं में पानी की टंकियां खाली पड़ी रहती हैं और चारे की उपलब्धता भी नियमित नहीं है। पशु चिकित्सकों के अनुसार भीषण गर्मी में गोवंशों को पर्याप्त पानी और छाया न मिले तो उनमें डिहाइड्रेशन, बीमारी और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कागजों में व्यवस्थाएं पूरी दिखाई जाती हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे तो गर्मी का यह दौर गोवंशों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
जनपद में गौशालाओं की स्थिति को लेकर अब प्रशासनिक जिम्मेदारी और निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। पशुप्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सभी गौशालाओं का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए तथा जहां लापरवाही मिले वहां जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जब सरकार गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकता बताती है और इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, तब तपती धूप में प्यास और गर्मी से जूझते गोवंश व्यवस्था की पोल खोलते नजर आते हैं। सवाल यह है कि आखिर मुख्यमंत्री के निर्देश रास्ते में ही क्यों दम तोड़ देते हैं?

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article