फर्रुखाबाद। गंगा का बढ़ता जलस्तर अब ग्रामीणों के आशियानों पर कहर बनकर टूट रहा है। कायमगंज तहसील के समैचीपुर चितार में सोमवार देर रात से गंगा के तेज कटान में 10 और मकान नदी में समा गए। गांव में अब तक 38 पक्के मकान गंगा की धारा में बह चुके हैं। हालात बिगड़ने से ग्रामीणों में दहशत है और प्रशासन ने बचे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
गांव में अब महज 50 परिवार ही बचे हैं, जबकि 15 परिवार बाढ़ शरणालय में शरण लिए हुए हैं। कई ग्रामीण शाहजहांपुर-शमसाबाद मार्ग के किनारे झोपड़ी डालकर या ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। कुछ परिवार रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ कटान लगातार तेज होने से ग्रामीणों को अपने घर और सामान की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
मामन, रुखसार, हनीफ, जहीरुद्दीन, सरवर हुसैन और पप्पू समेत 10 ग्रामीणों के मकान कटान की भेंट चढ़ गए। लेखपाल पंकज सिंह अपनी टीम के साथ गांव में बचे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। मंगलवार देर शाम तक ग्रामीणों को निकालने का सिलसिला जारी रहा।
शाहजहांपुर-शमसाबाद मार्ग पर भी बढ़ा पानी
उधर चौरा गांव के पास शाहजहांपुर-शमसाबाद मार्ग पर बाढ़ का पानी और बढ़ गया है। पानी बढ़ने के बावजूद वाहन चालक जान जोखिम में डालकर रास्ते से गुजर रहे हैं। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
कटरी तौफीक में स्कूल भी कटान की जद में
शमसाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित कटरी तौफीक गांव में भी गंगा का कटान तेज हो गया है। ग्रामीण महेश चंद्र का मकान कटान की चपेट में है। संविलियन विद्यालय के चारों कमरे गंगा में बह चुके हैं और अब बरामदे तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। विद्यालय के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।
झौआ से रूपपुर जाने वाला मार्ग कटरी तौफीक में कट जाने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीण अपने घर खाली कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। गंगा का जलस्तर और कटान इसी तरह बढ़ता रहा तो कई और परिवारों के सामने घर बचाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।


