अमृतपुर। गंगा नदी में लगातार बढ़ रहे जलप्रवाह से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। सोमवार शाम गंगा में 1,53,173 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जलस्तर तेजी से बढ़कर 136.60 मीटर से 136.90 मीटर तक पहुंच गया। जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी के बाद नदी किनारे बसे गांवों में चिंता का माहौल है और प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
उधर, रामगंगा नदी में भी तीन बैराजों से 1,323 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। संबंधित अधिकारी दोनों नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए उप जिलाधिकारी अमृतपुर श्वेता साहू ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने करनपुर घाट, बनारसीपुर, फखरपुर, मंझा और कुडरी सारंगपुर गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से मुलाकात की तथा उनकी समस्याएं सुनीं।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे।
एसडीएम ने कुडरी सारंगपुर में ग्राम प्रधान अतर सिंह सहित स्थानीय ग्रामीणों से क्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली तथा अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर राहत एवं बचाव व्यवस्था को भी अलर्ट मोड पर रखा है। अधिकारियों का कहना है कि गंगा और रामगंगा दोनों नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित ग्रामीणों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


