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Wednesday, April 29, 2026

गंगा से कोसों से दूर गंगा एक्सप्रेसवे के ‘भव्य उद्घाटन ’ मे फर्रुखाबाद दरकिनार

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– राष्ट्रीय स्तर पर फर्रुखाबाद का घोर अपमान,विधायकों, सांसद को न्योता तक नहीं
– सुरेश कुमार खन्ना बने पौराणिक पांचाल क्षेत्र के सबसे बड़े धुरंधर राजनीतिक
हरदोई। उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे के भव्य उद्घाटन कार्यक्रम में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में सियासी ताकत का प्रदर्शन हुआ, तब एक जिले की चुप्पी ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया,फर्रुखाबाद आखिर इस मंच से गायब क्यों रहा?
राष्ट्रीय स्तर के इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में कन्नौज, शाहजहांपुर,कानपुर नगर,हरदोई समेत कई जिलों के जनप्रतिनिधियों को न्योता दिया गया, लेकिन फर्रुखाबाद के विधायकों और सांसद को सार्वजनिक रूप से आमंत्रण तक नहीं मिला, सार्वजनिक रूप से प्रदेश स्तरीय तौर पर सूचना विभाग लखनऊ द्वारा जारी आमंत्रण मे साफ दिखा।इस घटनाक्रम ने जिले में सियासी अपमान की भावना को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं “क्या फर्रुखाबाद की कोई राजनीतिक हैसियत नहीं बची?” जैसे सवाल ट्रेंड कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ प्रोटोकॉल की चूक नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत और प्रभाव का सीधा संकेत है। हरदोई में कार्यक्रम के जरिए जहां सत्ता का केंद्रीकरण दिखा, वहीं फर्रुखाबाद की राजनीतिक पकड़ कमजोर नजर आई। जबकि जिले से तमाम वहां भीड़ बढाने के लिए भेजे गए वह बात अलग है कि उन वाहनों में सवारी की संख्या ना के बराबर थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने 6 फरवरी 2023 को हुए उस चर्चित बयान की याद भी ताजा कर दी, जब फर्रुखाबाद में आयोजित यूथ इंडिया के पत्रकार सम्मेलन में पड़ोसी जनपद के सबसे ताकतवर नेता और प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने खुले मंच से कहा था “हर नेता बड़ी योजनाओं को अपने जिले में खींचने की कोशिश करता है, जो ताकतवर होता है वही सफल होता है।” खन्ना ने यह भी स्वीकार किया था कि गंगा एक्सप्रेसवे को हरदोई ले जाना उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है, जबकि फर्रुखाबाद के नेताओं की अक्रमन्यता प्रमुख कारण रही ।
इतना ही नहीं, उसी मंच से खन्ना ने “खन्ना एक्सप्रेसवे ले गए, फर्रुखाबाद चूसेगा गन्ना” जैसे नारों का जवाब देते हुए गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे की घोषणा भी उसी दिन की थी। अब उस लिंक एक्सप्रेसवे पर काम शुरू हो चुका है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है, लेकिन मुख्य एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से फर्रुखाबाद का गायब रहना जिले की सियासी हैसियत पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है।
उस 6 फरवरी 2023 के कार्यक्रम कार्यक्रम ने जिले में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। मंच पर उठे सवालों से असहज नेताओं ने जहां दूरी बनाई, कार्यक्रम आयोजक शरद कटियार की पखवारा भीतर ही उन्हें मिली सुरक्षा को षड्यंत्र के तहत शासन से हटवा दिया गया था और दूसरे आयोजक वरिष्ठ पत्रकार एसके सिंह के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराकर उनकी छवि बिगड़ने की कोशिश की गई थी ।
आज जब हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन राष्ट्रीय सुर्खियां बटोर रहा है, तब फर्रुखाबाद की सियासत कटघरे में खड़ी है। सवाल सीधा है क्या जिले के जनप्रतिनिधि अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं? या फिर यह चुप्पी किसी बड़े सियासी समीकरण का हिस्सा है?

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