29 C
Lucknow
Wednesday, September 2, 2026

ई-20 पेट्रोल विवाद पर गडकरी की सफाई, बोले- शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो अधिक कीमत चुकानी होगी

Must read

 

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ई-20 पेट्रोल और इथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता इथेनॉल मिश्रित ईंधन नहीं लेना चाहता और पूरी तरह शुद्ध पेट्रोल चाहता है, तो उसे उसकी अधिक कीमत चुकानी होगी।

गडकरी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे निजी हितों के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का चीनी उद्योग से वर्षों पुराना संबंध है, लेकिन इथेनॉल नीति का संचालन पेट्रोलियम मंत्रालय करता है और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बेटों के कारोबार में इथेनॉल से होने वाली आय का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल इथेनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी आधा प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके उद्योग पर लगभग 1,600 करोड़ रुपये का ऋण है, इसलिए निजी लाभ के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल इथेनॉल ही नहीं, बल्कि हरित हाइड्रोजन, विद्युत चालित वाहन, मेथनॉल, बायोगैस और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के भी समर्थक हैं। उनका कहना है कि भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी बोझ पड़ता है। यदि देश में वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा तो आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।

उन्होंने बताया कि अब इथेनॉल केवल गन्ने से ही नहीं, बल्कि मक्का, धान, पराली, बांस और अन्य कृषि अवशेषों से भी तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और फसल अवशेष जलाने जैसी समस्या में भी कमी आएगी। गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील सहित कई देशों में वर्षों से इथेनॉल आधारित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।

गडकरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी पर कोई ईंधन थोपना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है। उन्होंने दोहराया कि यदि बाजार में पूरी तरह शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराया जाता है, तो उसकी लागत अधिक होगी और उसका सीधा असर कीमत पर पड़ेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं को अधिक राशि का भुगतान करना होगा।

केंद्र सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से पेट्रोलियम आयात में कमी, प्रदूषण नियंत्रण, किसानों की आय में वृद्धि और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से सरकार देश में जैव ईंधन के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article