फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित जननी सुरक्षा योजना में फर्रुखाबाद ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रभावी बनाने के कारण जनपद ने यह सफलता हासिल की है।
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के अनुसार 1 अप्रैल से 30 जून 2026 के बीच जनपद के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 4,462 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें से 3,682 लाभार्थियों को जननी सुरक्षा योजना के तहत भुगतान किया गया। इस प्रकार 82.52 प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करते हुए फर्रुखाबाद ने प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि पिछले माह जनपद का भुगतान प्रतिशत 19.36 प्रतिशत था और रैंक 63वीं थी। महज एक माह में 63वें स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना स्वास्थ्य विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस सफलता के पीछे नियमित मॉनिटरिंग, लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, डिजिटल भुगतान प्रणाली, बैंक खातों का सत्यापन और ब्लॉक स्तर पर सतत समीक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देशन तथा एसीएमओ (आरसीएच) एवं नोडल अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव के मार्गदर्शन में सभी स्वास्थ्य इकाइयों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
ब्लॉकवार प्रदर्शन भी संतोषजनक रहा। कमालगंज में 831 संस्थागत प्रसव के सापेक्ष 680 महिलाओं को भुगतान किया गया। मोहम्मदाबाद में 484 में से 390, नवाबगंज में 327 में से 268 तथा शमसाबाद में भी 81 प्रतिशत से अधिक भुगतान दर्ज किया गया। कायमगंज, जहां सर्वाधिक 1,155 संस्थागत प्रसव हुए, वहां भी अधिकांश पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिया जा चुका है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत पात्र गर्भवती महिलाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी हुई है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। योजना का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि विभाग का लक्ष्य केवल रैंक हासिल करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक समय पर योजना का लाभ पहुंचाना है। आने वाले समय में लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, प्रसव पूर्व जांच, सुरक्षित संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल पर विशेष फोकस किया जाएगा।
एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, स्टाफ नर्सों और चिकित्सा अधिकारियों की टीम ने गांव-गांव पहुंचकर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच, संस्थागत प्रसव और दस्तावेजों के सत्यापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप जनपद को यह उपलब्धि मिली।


