मोहित धवन
फर्रुखाबाद का नाम लेते ही लोगों के मन में सबसे पहले यदि किसी स्वाद की याद ताजा होती है, तो वह है यहां का सेम का बीज, दालमोठ, आलू का लच्छा और गड़वड़ नमकीन। यह केवल खाने की चीजें नहीं हैं, बल्कि जिले की सांस्कृतिक पहचान और वर्षों से चली आ रही एक समृद्ध परंपरा का हिस्सा हैं। देश के किसी भी कोने में रहने वाला फर्रुखाबाद का व्यक्ति जब अपने शहर को याद करता है तो अक्सर यही कहता है”फर्रुखाबाद का सेम का बीज भेज देना।” यही एक वाक्य इस उद्योग की लोकप्रियता और लोगों के भावनात्मक जुड़ाव को बयां कर देता है।
करीब एक शताब्दी पहले घरों और छोटी दुकानों से शुरू हुआ यह उद्योग आज हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार बन चुका है। उत्पादन, मसाला निर्माण, पैकिंग, परिवहन और विपणन से जुड़े हजारों लोग इस कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। फर्रुखाबाद का नमकीन उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और देश के अनेक हिस्सों तक अपनी खास पहचान बना चुका है।
यदि इस उद्योग की विरासत की बात करें तो कभी देशराज नमकीन गुणवत्ता और भरोसे का पर्याय माना जाता था। आज भी पुराने लोग उसके स्वाद को याद करते हैं। समय के साथ उद्योग ने नया रूप लिया और वर्तमान में सूर्या नमकीन ने अपनी गुणवत्ता, आधुनिक सोच और ग्राहकों के विश्वास के बल पर प्रदेश ही नहीं, देशभर में अलग पहचान बनाई है। इसके साथ गणेश नमकीन, किशन नमकीन सहित कई प्रतिष्ठित संस्थान इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
फिर भी एक सवाल आज भी सामने खड़ा है—क्या फर्रुखाबाद का नमकीन उद्योग अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच पाया है?
उत्तर स्पष्ट है—अभी नहीं।
जिस स्वाद की मांग पूरे देश में है, वह आज भी सीमित बाजारों तक सिमटा हुआ है। देश के बड़े ब्रांड आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग, मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं, जबकि फर्रुखाबाद का नमकीन अभी भी मुख्यतः अपने स्वाद और पुराने ग्राहकों के भरोसे आगे बढ़ रहा है।
आज जरूरत केवल स्वाद बनाने की नहीं, बल्कि ब्रांड बनाने की है। आकर्षक पैकेजिंग, एकरूप गुणवत्ता, डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया कैंपेन, ऑनलाइन बिक्री और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन इस उद्योग की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं। यदि जिले के प्रमुख निर्माता प्रतिस्पर्धा छोड़कर “फर्रुखाबाद नमकीन” के नाम से सामूहिक ब्रांड पहचान विकसित करें, तो यह केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि पूरे जिले की आर्थिक पहचान बन सकता है।
सरकार की भूमिका भी यहां बेहद महत्वपूर्ण है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग योजनाओं के माध्यम से आसान ऋण, आधुनिक मशीनों पर अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात प्रोत्साहन, व्यापार मेलों में भागीदारी और सबसे महत्वपूर्ण “फर्रुखाबाद के सेम के बीज” तथा “फर्रुखाबाद के दालमोठ” को जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन ) टैग दिलाने की दिशा में ठोस प्रयास होने चाहिए। इससे इस उद्योग को कानूनी पहचान के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई ताकत मिलेगी।
फर्रुखाबाद का नमकीन केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि जिले की सांस्कृतिक धरोहर, आर्थिक शक्ति और सामाजिक पहचान है। जिस तरह आगरा पेठे, बीकानेर भुजिया और इंदौर नमकीन के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है, उसी तरह फर्रुखाबाद भी अपने सेम के बीज और दालमोठ के दम पर वैश्विक पहचान बना सकता है।


