फर्रुखाबाद
पुलिस महकमे में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा और विवादों के केंद्र में है। वर्ष 2011 बैच का सिपाही सचेंद्र सिंह (पीएनओ 112391209) पिछले एक दशक से ज्यादा समय से जिले में इस तरह जड़ें जमाए बैठा है कि मानो पूरा सिस्टम उसी के इशारों पर चलता हो। पुलिस लाइन से लेकर थाना, एसओजी, सर्विलांस और माफिया सेल तक उसकी पकड़ की चर्चाएं खुलेआम होती हैं। जिले में आम लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर एक साधारण सिपाही के पास इतनी ताकत आई कहां से कि वह दरोगाओं और इंस्पेक्टरों तक को अपने इशारों पर नचाने लगा।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा सरकार के दौरान जब तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अशोक मीणा ने जिले की कमान संभाली तो उन्हें सबसे पहले इसी सिपाही की करतूतों की फाइलें सुनने को मिलीं। आरोप लगे कि लंबे समय से एसओजी में जमे इस सिपाही ने पुलिस विभाग की गोपनीय सूचनाओं को बाहर पहुंचाने, नेताओं के यहां चक्कर लगाने और अधिकारियों के नाम पर खेल करने का पूरा नेटवर्क बना रखा था। यही नहीं, पुलिस और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव कराने तक की चर्चाएं विभाग में होती रहीं। मामला बढ़ा तो उसे जिले से हटाकर जीआरपी भेज दिया गया, लेकिन सिस्टम में जुगाड़ और सेटिंग इतनी मजबूत रही कि महज एक साल में ही फिर जिले में वापसी करा ली गई।
जिले में चर्चा है कि वापसी के बाद यह सिपाही सीधे माफिया सेल और सर्विलांस के जरिए अपना साम्राज्य चलाने लगा। आरोप है कि कुख्यात माफिया अनुपम दुबे का नाम लेकर लोगों को डराया जाता था। जिसके कान में भी यह डाल दिया जाता कि तुम्हारा नाम भी माफिया की सूची में आ रहा है”l, उसके घर से मोटी रकम निकलना तय माना जाता था। जिले में यह भी कहा जाने लगा कि गैंगस्टर एक्ट की पूरी टीम वही तैयार करता है और किसके खिलाफ कार्रवाई होगी, किसे बचाया जाएगा और किसे डराया जाएगा, इसका खेल भी उसी के इर्द गिर्द घूमता है।
तंबाकू कारोबारियों के बीच भी यह नाम दहशत का पर्याय बना है । कायमगंज क्षेत्र में कई व्यापारियों के बीच चर्चा रही कि जीएसटी चोरी के मुकदमों और गैंगस्टर कार्रवाई का डर दिखाकर वसूली का खेल खेला चल रहा है । आरोप यहां तक लग रहे हैं कि एक दरोगा के साथ मिलकर मुकदमे दर्ज कराए गए और फिर कार्रवाई मे नाम हटबाने के नाम पर सौदेबाजी शुरू हुई। व्यापारियों में यह बात खुलेआम कही जाने लगी कि अगर ऊपर तक पैसा नहीं पहुंचा तो गैंगस्टर लगेगा।
सबसे बड़ा सवाल इस सिपाही की संपत्ति को लेकर खड़ा हो रहा है। पुलिस विभाग के भीतर ही चर्चा है कि नौकरी से ज्यादा तेजी से इसकी संपत्तियां बढ़ीं। आरोप हैं कि पत्नी, रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर करोड़ों की जमीनें और संपत्तियां खड़ी कर ली गईं। आखिर एक सिपाही की आय इतनी कहां से आई कि आलीशान रहन सहन और करोड़ों की संपत्ति का साम्राज्य तैयार हो गया। जिले में लोग मांग कर रहे हैं कि इसकी आय से अधिक संपत्ति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी हैं कि यह सिपाही एक सजातीय बड़े अधिकारी का नाम लेकर दरोगाओं और इंस्पेक्टरों तक पर दबाव बनाता रहा। कई जिम्मेदार अधिकारियों का नाम लेकर खुद की धौंस जमाना इसकी आदत बन गई। पुलिस महकमे में चर्चा है कि जो अधिकारी इसकी बात नहीं मानता, उसके खिलाफ नेताओं और बाहरी लोगों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश शुरू हो जाती है।अब सवाल सिर्फ एक सिपाही का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का है। आखिर कैसे एक कांस्टेबल वर्षों तक जिले में मलाईदार पोस्टिंगों पर बना रहता है कैसे हर बार कार्रवाई से बच निकलता है और क्यों उसके खिलाफ उठती आवाजें हमेशा दब जाती हैं फर्रुखाबाद में लोग अब खुलकर कहने लगे हैं कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े चेहरों की पोल भी खुल सकती है।


