40 C
Lucknow
Sunday, May 24, 2026

चार डॉक्टरों के भरोसे चल रहा सर्जरी सिस्टम?

Must read

– दर्जन भर अस्पतालों में ऑपरेशन को अकेले संभाले जिम्मा

फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत अब चिंताजनक है। जिले में करीब 92 अस्पतालों और नर्सिंग होम में ऑपरेशन होने का दावा किया जाता है, लेकिन अंदरखाने की स्थिति यह बताई जा रही है कि पूरे सिस्टम का भार गिने-चुने 4 डॉक्टरों पर टिका हुआ है।यह डॉक्टर एक ही दिन में कई-कई अस्पतालों में पहुंचकर ऑपरेशन कर रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा मानकों की खुलेआम अनदेखी आम बात हो चुकी हैं।

चिकित्सा जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार डॉ. एस.के. मौर्य और डॉ. ए.के. गुप्ता जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों में लगातार ऑपरेशन करने जाते हैं। आरोप है कि यह सिलसिला केवल एक या दो अस्पतालों तक सीमित नहीं बल्कि कमालगंज, कायमगंज, मोहम्मदाबाद और शहर क्षेत्र तक फैला हुआ है। सबसे अधिक चर्चाएं सेवा हॉस्पिटल, सिद्धार्थ हॉस्पिटल और कमालगंज स्थित समीर हॉस्पिटल को लेकर हो रही हैं, जहां कथित रूप से नियमित रूप से ऑपरेशन किए जाते हैं।

सूत्रों का कहना है कि डॉ. मौर्य और डॉ. गुप्ता सुबह से देर रात तक अलग-अलग अस्पतालों में सर्जरी करते दिखाई देते हैं। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों का सवाल है कि आखिर एक डॉक्टर एक ही दिन में इतनी जगहों पर किस गुणवत्ता और मानक के साथ ऑपरेशन कर सकता है? क्या हर अस्पताल में आवश्यक ऑपरेशन थिएटर प्रोटोकॉल, एनेस्थीसिया टीम, पोस्ट ऑपरेटिव निगरानी और आपातकालीन सुविधा मौजूद है?

इसी कड़ी में डॉ. अजय नाथ, डॉ. अंकित गंगवार और डॉ. अमर के नाम भी कई निजी अस्पतालों से जोड़े जा रहे हैं। आरोप हैं कि ये डॉक्टर भी कथित रूप से कई ऐसे अस्पतालों में ऑपरेशन करने पहुंचते हैं जहां आधारभूत चिकित्सा मानकों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। हालांकि संबंधित डॉक्टरों या अस्पताल प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। यदि एक ही डॉक्टर दर्जन भर अस्पतालों में ऑपरेशन कर रहा है, तो क्या विभाग के पास इसका रिकॉर्ड है? क्या सीएमओ कार्यालय यह जांच करता है कि जिन अस्पतालों में सर्जरी हो रही है वहां स्थायी सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, ब्लड सपोर्ट और आईसीयू जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं?

जानकार बताते हैं कि नियमों के अनुसार किसी भी ऑपरेशन केंद्र को पंजीकरण के समय विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित स्टाफ, उपकरण और आपातकालीन सुविधाओं का पूरा विवरण देना होता है। लेकिन जिले में कथित तौर पर “विजिटिंग डॉक्टर मॉडल” पर अस्पतालों का संचालन तेजी से बढ़ा है, जिसमें अस्पताल केवल मरीज जुटाते हैं और डॉक्टर अलग-अलग स्थानों पर जाकर सर्जरी करते हैं।

सबसे बड़ा खतरा ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में संचालित उन अस्पतालों को लेकर बताया जा रहा है जहां गंभीर मरीजों का भी ऑपरेशन कर दिया जाता है, लेकिन जटिल स्थिति बनने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में कई बार मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती।

अब जरूरत इस बात की महसूस की जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग जिले के सभी ऑपरेशन थिएटरों और सर्जिकल सेंटरों का विशेष ऑडिट कराए। यह भी सार्वजनिक किया जाए कि किस अस्पताल में कौन विशेषज्ञ स्थायी रूप से तैनात है और कौन डॉक्टर कितने अस्पतालों में सेवाएं दे रहा है। क्योंकि सवाल केवल नियमों का नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी का है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article