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Friday, July 10, 2026

नया शिक्षा सत्र शुरू, फिर भी परिषदीय विद्यालयों में घट रही छात्र संख्या

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बरसात बनी बड़ी बाधा, जलभराव और बदहाल व्यवस्थाओं से ‘स्कूल चलो अभियान’ पर मंडराया संकट
शमशाबाद, फर्रुखाबाद। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू हो गया है, लेकिन इस बार विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने के बजाय घटती दिखाई दे रही है। लगातार हो रही बारिश और विद्यालयों की बदहाल व्यवस्थाओं ने शासन के ‘स्कूल चलो अभियान’ की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरसात शुरू होते ही क्षेत्र के कई परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। कहीं विद्यालय के मुख्य द्वार पर जलभराव है तो कहीं पूरे प्रांगण में पानी भरा हुआ है। कई स्कूलों की छतों से पानी टपक रहा है, जिससे कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे माहौल में बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दोनों ही चुनौती बन गई हैं।
अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दौरान बच्चों को कीचड़, जलभराव और फिसलन भरे रास्तों से होकर स्कूल भेजना जोखिम भरा है। गंदे पानी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। यही वजह है कि नए सत्र के शुरुआती दिनों में ही विद्यालयों में उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम देखी जा रही है।
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विद्यालय खुलने के साथ ही बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। जिन विद्यालयों में मरम्मत और जलनिकासी जैसी समस्याएं हैं, उन्हें दूर करने में समय लगेगा। सरकारी प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि बरसात का अधिकांश समय बीत जाने के बाद भी कई विद्यालयों की व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाएंगी।
शमशाबाद विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालयों में शौचालयों में पानी भरा हुआ है, जबकि कक्षाओं में सीलन और नमी के कारण बच्चों को बैठने में परेशानी हो रही है। सबसे अधिक दयनीय स्थिति कटरी क्षेत्र के विद्यालयों की बताई जा रही है, जहां हर वर्ष बाढ़ का खतरा बना रहता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कुछ ही दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर कटरी क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ सकता है। ऐसे में लोगों के लिए अपने घरों की सुरक्षा करना ही मुश्किल हो जाता है, विद्यालयों की व्यवस्था बनाए रखना और भी कठिन हो जाता है। बाढ़ के दौरान इस क्षेत्र के कई विद्यालय लंबे समय तक बंद रहने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
अभिभावकों का कहना है कि जब तक विद्यालयों में जलनिकासी, छतों की मरम्मत, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जाएंगी, तब तक छात्र संख्या में अपेक्षित वृद्धि होना मुश्किल है। उनका मानना है कि सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिलने पर ही बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंच सकेंगे।
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही परिषदीय विद्यालयों के सामने खड़ी इन समस्याओं ने शिक्षकों और शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वे इन समस्याओं का समाधान कितनी गंभीरता से करते हैं। यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं, तो सरकार का ‘स्कूल चलो अभियान’ भी प्रभावित हो सकता है।

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