नोएडा। नोएडा में करोड़ों रुपये मूल्य की महर्षि आश्रम ट्रस्ट की जमीन के कथित फर्जीवाड़े की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में जांच तेज करते हुए रजिस्ट्री विभाग से वर्ष 1993 से लेकर अब तक के भूमि हस्तांतरण और रजिस्ट्री से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक ईडी की टीम ने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर करीब तीन घंटे तक अधिकारियों से गहन पूछताछ की। इस दौरान जमीन के स्वामित्व, ट्रस्ट के गठन और विभिन्न रजिस्ट्रियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। पूछताछ के बाद विभाग द्वारा करीब तीन दर्जन महत्वपूर्ण दस्तावेज ईडी को सौंपे गए हैं।
जांच एजेंसी की पड़ताल करीब 3.36 हेक्टेयर भूमि से जुड़े उस कथित घोटाले पर केंद्रित है, जिसमें आरोप है कि मूल ट्रस्ट से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर एक अन्य ट्रस्ट का गठन किया गया और उसके माध्यम से करोड़ों रुपये की जमीन का सौदा कर दिया गया। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस पूरी प्रक्रिया में सुनियोजित तरीके से दस्तावेजी हेरफेर और पहचान संबंधी भ्रम पैदा किया गया।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इस प्रकरण में दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ईडी धनशोधन और अवैध आर्थिक लाभ के पहलुओं की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन बिक्री से प्राप्त धनराशि किन-किन खातों और व्यक्तियों तक पहुंची।
भूमि घोटाले की जांच में अब 1993 से अब तक के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जमीन के स्वामित्व में कब और किन परिस्थितियों में बदलाव हुआ। माना जा रहा है कि पुराने दस्तावेजों की जांच से कई नए नाम और तथ्य सामने आ सकते हैं।


