कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। चुनाव आयोग (ECI) ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और बगावती नेता ऋतब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को नोटिस जारी कर संगठनात्मक संरचना और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर किए गए परस्पर विरोधी दावों पर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने दोनों पक्षों को सोमवार, 6 जुलाई, शाम 5:30 बजे तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संगठन और चुनाव चिह्न पर वैध अधिकार का दावा कर रहा है। इसी विवाद को देखते हुए चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से आधिकारिक जवाब मांगने का फैसला किया है।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने चुनाव आयोग द्वारा अलग गुट से बातचीत किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऋतब्रता बनर्जी को पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है, इसलिए उन्हें पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि निष्कासित नेता के नेतृत्व वाले समूह को आयोग के समक्ष सुनवाई का अवसर देना उचित नहीं है और उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल हैं।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी बगावती गुट को अवैध बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार केवल पार्टी का अधिकृत प्रतिनिधि या नामित हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग को पत्र लिख सकता है या आधिकारिक बैठक कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्कासित सदस्य के नेतृत्व वाला समूह पार्टी की ओर से कोई वैध दावा नहीं कर सकता।
वहीं, ऋतब्रता बनर्जी ने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग की बेंच से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई मिलने पर संतोष है।
अब सभी की निगाहें 6 जुलाई पर टिकी हैं, जब दोनों पक्ष चुनाव आयोग के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद आयोग यह तय कर सकता है कि पार्टी की अधिकृत संगठनात्मक संरचना और प्रतिनिधित्व को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएं। यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और टीएमसी के भविष्य के लिए अहम साबित हो सकता है। समयऔर कैलेंडर


