शमशाबाद, फर्रुखाबाद। पड़ रही भीषण गर्मी ने इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और किसानों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ते तापमान और सूखते तालाबों ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। गांवों में अधिकांश तालाब सूख चुके हैं, जिससे बेजुबान पशु-पक्षियों के सामने पानी का संकट गहरा गया है। वहीं किसान भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से परेशान दिखाई दे रहे हैं।
मई माह की चिलचिलाती धूप और आसमान से बरसती आग के बीच लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। इंसान तो किसी तरह कूलर, पंखे और छांव का सहारा ले रहे हैं, लेकिन पशु-पक्षियों के लिए हालात बेहद कठिन हो गए हैं। भोजन और पानी की तलाश में पक्षी खेतों, बाग-बगीचों और गांव के आसपास भटकते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब सूख जाने से बेजुबान जानवरों और पक्षियों को पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले गर्मी के मौसम में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर तालाबों में पानी भरवाया जाता था, जिससे पशु-पक्षियों को राहत मिलती थी। तालाबों के आसपास पक्षियों का कलरव और पशुओं की चहल-पहल देखने को मिलती थी, लेकिन इस बार अधिकांश तालाब सूखे पड़े हैं। कहीं तालाबों का उपयोग उपले बनाने में हो रहा है तो कहीं उन्हें पशुओं के तबेले के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। कई सूखे तालाबों में बच्चे क्रिकेट खेलते नजर आ रहे हैं।
किसानों ने निचली गंगा नहर में भी पर्याप्त पानी न होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसान नहर के पानी पर ही खेती के लिए निर्भर रहते हैं। वर्तमान समय में मक्का, ज्वार, बाजरा, चरी, मूंगफली जैसी फसलों के साथ-साथ आम के बागों में भी सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन नहर में बहुत कम पानी छोड़ा जा रहा है। किसानों का कहना है कि नहर का पानी “ऊंट के मुंह में जीरा” साबित हो रहा है।
ग्रामीण किसानों ने बताया कि जिन किसानों के पास निजी संसाधन नहीं हैं, उनके लिए महंगे किराए पर सिंचाई कराना संभव नहीं है। संपन्न किसान 150 से 200 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई का शुल्क वसूल रहे हैं, जिससे छोटे और गरीब किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि निचली गंगा नहर में पर्याप्त पानी छोड़ा जाए ताकि टेल तक पानी पहुंच सके और किसानों को राहत मिल सके। साथ ही गांवों के तालाबों का सुंदरीकरण कर उनमें पानी भरवाया जाए, जिससे पशु-पक्षियों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके।
ग्रामीणों ने कहा कि तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं बल्कि गांव की जीवनरेखा होते हैं। तालाबों से भूगर्भ जलस्तर संतुलित रहता है और जलीय जीवों के साथ पशु-पक्षियों को भी जीवन मिलता है। लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो भीषण गर्मी में पानी की कमी पशु-पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। वहीं ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या अधिकारी तालाबों में पानी भरवाने के लिए अब बरसात का इंतजार कर रहे हैं।


