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Friday, May 8, 2026

फर्रुखाबाद में अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई की मांग तेज, भाजपा नेताओं ने डीएम को सोपा ज्ञापन

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फर्रुखाबाद। अवैध और अमानक रूप से संचालित अस्पतालों को लेकर एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर जिले में संचालित अवैध अस्पतालों, फर्जी ऑपरेशन और प्रसूताओं की मौत के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जिले में कई निजी अस्पताल बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों के संरक्षण में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि 30 अप्रैल को भी इस संबंध में शिकायत की गई थी, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि जांच उन्हीं अधिकारियों को सौंप दी गई जिनकी निगरानी में यह पूरा खेल चल रहा है।
ज्ञापन में सबसे गंभीर मामला मसेनी स्थित गायत्री हॉस्पिटल का बताया गया है। आरोप है कि तीन दिन पूर्व प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से रेनू पत्नी अनुज कुमार निवासी रसीदपुर थाना कम्पिल की मौत हो गई थी। परिजनों को बताया गया कि ऑपरेशन डॉ. ए.के. गुप्ता ने किया था, जबकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ऑपरेशन अस्पताल संचालक अरविंद द्वारा किया गया। घटना के बाद अस्पताल स्टाफ मौके से फरार हो गया और बाद में परिजनों को समझौते के लिए दबाव और प्रलोभन दिया गया।
ज्ञापन में मांग की गई है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और ऑपरेशन के समय डॉ. ए.के. गुप्ता की मोबाइल लोकेशन की जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि 20 बेड वाले अस्पताल का संचालन बीएएमएस डॉक्टर के नाम पर किया जा रहा है, जबकि वहां कोई योग्य एमबीबीएस सर्जन उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद प्रसूताओं के ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जो गंभीर लापरवाही है।
इसके अलावा 4 अप्रैल 2026 को मऊदरवाजा क्षेत्र स्थित आदर्श मेडिसिन क्लीनिक में गलत इंजेक्शन लगाए जाने से गीता पत्नी कौशलेन्द्र पाल की मौत का मामला भी उठाया गया। आरोप है कि उस मामले में भी सिर्फ क्लीनिक बंद कर खानापूर्ति कर दी गई और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
ज्ञापन में 7 फरवरी 2026 को कुलवन्ती हॉस्पिटल में डिलीवरी ऑपरेशन के दौरान राखी पत्नी शिवकांत निवासी इटावा की मौत का मामला भी शामिल किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि अस्पताल में न तो कोई योग्य सर्जन है और न ही एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिर भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
भाजपा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल अस्पतालों की ओटी सील कर औपचारिकता निभाता है, जबकि अस्पताल दोबारा शुरू हो जाते हैं। उन्होंने मसेनी चौराहे के आसपास संचालित अस्पतालों की विशेष जांच कराने, लाइसेंस निरस्त करने और लंबे समय से तैनात नोडल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार हो रही लापरवाही से आम लोगों का भरोसा टूट रहा है और समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं।

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