– सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बड़े नाम रडार पर
फर्रुखाबाद। जिले में भूमाफिया और अवैध प्लॉटिंग करने वालों के लिए अब जमीन खिसकती दिख रही है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के कड़े तेवर और जिम्मेदार अधिकारिओं द्वारा फाइलों की ताबड़तोड़ तलबी के बाद ठंडी सड़क से लेकर हाईवे किनारे, और दोनों बघार नालों, जसमई तथा कायमगंज तक फैले अवैध कॉलोनी नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, बिना लेआउट पास कर हाउसिंग सोसायटी खड़ी करने वाले बड़े नामों की सूची तैयार हो रही है, और कार्रवाई की घड़ी नजदीक है।
ठंडी सड़क पर बगैर स्वीकृत लेआउट के हाऊसिंग सोसायटी विकसित करने के आरोपों के बीच लक्ष्मी शीतलय और उससे जुड़े समूह पर प्रशासन की नजरें टिक गई हैं। इसी कड़ी में ऐसे प्रतिष्ठान भी रडार पर हैं जिन्होंने आवासीय नक्शा पास कराकर होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दीं,यानी नियमों का खुला उल्लंघन। स्थानीय स्तर पर ठंडी सड़क स्थित “केएम इंडिया” और “केएम हाउस” नाम से संचालित कामर्शियल परिसरों के उपयोग पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जिनकी पड़ताल तेज हो गई है। पूर्व जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर मजिस्ट्रेट दो बार इन भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर चुके हैं लेकिन सेटिंग के बल पर फाइल दबा दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ‘नो लेआउट नो कंस्ट्रक्शन’
हालिया रुख में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बिना मानचित्र लेआउट के निर्माण, अवैध कॉलोनियों का विकास और सरकारी जमीनों पर कब्जे पर राज्यों को सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही रिहायशी पास नक़्शे की जगह को कामर्शियल यूज पर कड़ाई से कार्रवाई होगी। अदालत ने कई मामलों में अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया । इसी के बाद जिलों में प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय मोड में है।
सदर तहसील के नेकपुर कलां में ‘अवैध कॉलोनी’ का जाल, तालाब पाटने के खेल और आवास विकास कॉलोनी जैसे पाश इलाके मे खुलेआम अवैध प्लॉटिंग प्रशासन के रडार पर है, यहाँ बिना मानचित्र पास कराये निर्माण, मनमानी और बुनियादी सुविधाओं के बिना बिक्री आदि इन सबकी शिकायतें सामने आई हैं। सबसे गंभीर आरोप यहाँ सरकारी तालाब को पाटकर कब्जा करने का है। पता चला है जिलाधिकारी ने संबंधित मामलों की जानकारी संज्ञान ली है,जिससे साफ है कि अब कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहने वाली।
हाईवे पर अस्पताल निर्माण की आड़ मे ‘ब्लैक प्लॉटिंग’
इटावा-बरेली हाईवे के चांदपुर क्षेत्र में भी बिना मानचित्र पास किए चरणबद्ध निर्माण की बात और कई विवाद सामने आये हैं । पूर्व प्रशासन ने इसे संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी थी, बताते हैं बाद मे मामला एक रिटायर्ड कमी ने सेटिंग की भेंट चला दिया था । सूत्र बताते हैं कि यहां बड़े पैमाने पर प्लॉट काटकर बिक्री की तैयारी थी बिना किसी वैध स्वीकृति के ही।
आंकड़े जो खोलते हैं खेल
नगर निकायों में आने वाली शिकायतों का बड़ा हिस्सा अवैध निर्माण रिहायशी से कामर्शियल उपयोग से जुड़ा।
राज्यभर में हर साल सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित होतीं ज्यादातर में सीवर, ड्रेनेज, फायर सेफ्टी जैसी सुविधाएं नदारद होतीं हैं ।
खरीदारों के फंसने के मामलों में बढ़ोतरी रजिस्ट्री के बाद भी वैध लेआउट नक्शा नहीं मिलता।
डीएम के मंसूबे साफ हैं ‘कानून से ऊपर कोई नहीं’ डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली ने संकेत दे दिया है,अब सेटिंग-सिस्टम नहीं, नियम-कानून चलेगा। जिन प्रोजेक्ट्स के पास वैध स्वीकृतियां नहीं हैं, उन पर सीलिंग, भारी जुर्माना और जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जिले में वर्षों से पनपे अवैध प्लॉटिंग के इस नेटवर्क पर क्या यह कार्रवाई निर्णायक चोट साबित होगी? फिलहाल एक बात साफ है सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और डीएम के कड़े तेवरों के बीच भूमाफिया के ‘गोल्डन डेज’ खत्म होते दिख रहे हैं, और आने वाले दिनों में कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं।


