फर्रुखाबाद। जनपद में सरकार द्वारा किसानों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई आलू खरीद व्यवस्था जमीनी हकीकत में सवालों के घेरे में नजर आ रही है। मण्डी समिति सातनपुर स्थित आलू क्रय केंद्र का जिलाधिकारी डॉ0 अंकुर लाठर द्वारा निरीक्षण तो किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि सख्त मानकों और जटिल प्रक्रियाओं के चलते किसान अब भी परेशान हैं और केंद्र पर खरीद की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जिला उद्यान अधिकारी राघवेन्द्र सिंह से व्यवस्थाओं और खरीद प्रक्रिया की जानकारी ली तथा किसानों से संवाद कर बाजार में आलू के दामों की स्थिति जानी। हालांकि किसानों ने इशारों-इशारों में अपनी पीड़ा भी जाहिर की कि निर्धारित मानकों के कारण उनका अधिकांश आलू क्रय केंद्र पर रिजेक्ट हो रहा है, जिससे उन्हें मजबूरन औने-पौने दामों पर बाजार में फसल बेचनी पड़ रही है।
सरकार द्वारा फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) के तहत ₹650.09 प्रति कुंतल की दर तय की गई है, लेकिन 45 से 85 मिमी आकार, साफ-सुथरा, बिना रोग और पूरी तरह ग्रेडेड आलू जैसी शर्तें किसानों के लिए बड़ी बाधा बन गई हैं। छोटे और मध्यम किसान, जिनके पास छंटाई और ग्रेडिंग की सुविधाएं नहीं हैं, वे इस योजना से लगभग बाहर होते नजर आ रहे हैं।
हालांकि प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में किया जाएगा, लेकिन किसानों का कहना है कि जब उनका आलू ही मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा, तो भुगतान की बात बेमानी है।
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप आलू लेकर आएं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जमीनी स्तर पर किसानों को इन मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन और सहायता दी गई है?
कुल मिलाकर, सरकार की मंशा भले ही किसानों को उचित मूल्य दिलाने की हो, लेकिन सख्त नियमों और अव्यवहारिक शर्तों के कारण फर्रुखाबाद के आलू किसानों की उम्मीदें फिलहाल अधूरी ही नजर आ रही हैं।


