फर्रुखाबाद। मानसून की दस्तक से पहले जिला प्रशासन ने बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। गंगा और रामगंगा नदी के किनारे बसे गांवों को संभावित बाढ़ और कटान से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी क्रम में मंगलवार को प्रशासन द्वारा मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन कर आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों को परखा गया।
जिलाधिकारी डॉ अंकुर लाठर ने बताया कि जनपद में बाढ़ की दृष्टि से 77 गांवों को अतिसंवेदनशील तथा 112 गांवों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इन गांवों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जाएंगे।
फर्रुखाबाद जनपद का लगभग 68 किलोमीटर लंबा गंगा तटीय क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आता है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले के 300 से अधिक गांव प्रतिवर्ष बाढ़ और कटान से प्रभावित होते हैं। सबसे अधिक प्रभाव अमृतपुर तहसील क्षेत्र में देखने को मिलता है।
प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 52 बाढ़ चौकियों और 24 बाढ़ शरणालयों की स्थापना की गई है। इनमें सदर तहसील में 4 बाढ़ चौकियां और 5 शरणालय, कायमगंज में 15 चौकियां और 6 शरणालय तथा अमृतपुर तहसील में 33 चौकियां और 13 शरणालय बनाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 15 जून के बाद सभी बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी के अनुसार राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जिले में 191 नावों और नाविकों की तैनाती की जा रही है। इनमें सदर तहसील में 30, कायमगंज में 54 तथा अमृतपुर तहसील में 107 नावें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों की भी तैनाती की जा रही है। सदर क्षेत्र में 5, कायमगंज में 28 और अमृतपुर में 20 गोताखोर राहत कार्यों के लिए उपलब्ध रहेंगे।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक सदर तहसील के 37, कायमगंज के 113 और अमृतपुर के 172 गांव प्रतिवर्ष बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इन क्षेत्रों में बाढ़ के साथ-साथ नदी कटान की समस्या भी गंभीर बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों की कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्रों को नुकसान पहुंचता है।
मौसम विभाग ने 15 से 25 जून के बीच मानसून के उत्तर प्रदेश पहुंचने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य, पशुपालन, सिंचाई, राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को समन्वय बनाकर कार्य करने के लिए कहा गया है।
मेगा मॉक ड्रिल के माध्यम से राहत एवं बचाव दलों की कार्यक्षमता, संचार व्यवस्था, नाव संचालन, शरणालय प्रबंधन तथा आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों का परीक्षण किया गया। प्रशासन का दावा है कि इस बार बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पहले से अधिक व्यापक और व्यवस्थित तैयारियां की गई हैं।
हालांकि हर वर्ष बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को राहत शिविरों, पशुओं के चारे, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन की तैयारियां वास्तविक बाढ़ के दौरान कितनी कारगर साबित होती हैं, इस पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।


