दो माह में हिसाब दो, नहीं तो होगी रिकवरी और कार्रवाई
फर्रुखाबाद। जनपद की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2024-25 की लेखा परीक्षा (ऑडिट) में 26 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। ऑडिट के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से संबंधित पत्रावलियां और अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे पूरे मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सख्त रुख अपना लिया है।
डीएम के निर्देश पर संबंधित प्रधानों, प्रशासकों एवं तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दो माह के भीतर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के समक्ष सभी मूल अभिलेख, भुगतान विवरण, कार्यों का रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए अथवा स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ अधिभार (रिकवरी), विभागीय कार्रवाई और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी वित्तीय अनियमितता कमालगंज ब्लॉक की गदनपुर तुर्रा ग्राम पंचायत में सामने आई है, जहां ₹93,05,909 का अधिभार आरोपित किया गया है। इसके अलावा गंगाइच में ₹68,65,000, नसरतपुर नौगांव में ₹61,50,000, अहिमलापुर में ₹61,18,000, सियापुर में ₹48,69,000, अजीजलपुर में ₹45,11,000, भोजपुर में ₹41,98,729, नहरैया में ₹36,56,000, उस्मानगंज में ₹32,33,000, शमसाबाद के लोहापानी में ₹26,02,353, करीमगंज में ₹24,61,000, श्रृंगीरामपुर में ₹22,73,000, नैगवां में ₹18,43,141, नगला सेठ में ₹17,73,339, भिड़ौर में ₹14,03,578, लौआ नगला मानपट्टी में ₹12,02,000 तथा फतेहउल्लापुर में ₹11,66,000 का अधिभार लगाया गया है। अन्य ग्राम पंचायतों की भी जांच जारी है।
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च की गई धनराशि के वाउचर, बिल, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेज ऑडिट टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। कई मामलों में भुगतान का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी भुगतान और गबन की आशंका और अधिक गहरा गई है। प्रशासन अब प्रत्येक आपत्ति की बिंदुवार जांच कराएगा और दोष तय होने पर संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी जनपद की 16 ग्राम पंचायतों में गेटवे पोर्टल का उपयोग किए बिना लगभग ₹29.82 लाख का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया था, जिस पर शासन ने संज्ञान लिया था। इसके बावजूद कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई न होने के कारण अब प्रशासन ने इस बार सख्त रुख अपनाया है।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी धन में किसी भी प्रकार की हेराफेरी, वित्तीय अनियमितता या अभिलेख छिपाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई भी प्रधान, सचिव या संबंधित अधिकारी जवाब देने में विफल रहता है या अभिलेख प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीएम के इस सख्त रवैये के बाद संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।


