नागपुर। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज पर की गई टिप्पणी को लेकर देशभर में उठे विरोध के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। महाराष्ट्र में बढ़ते विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच शास्त्री ने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने बयान पर खेद जताया और कहा कि उनके शब्दों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
दरअसल, नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक प्रसंग सुनाया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्धों से थककर महाराज ने अपने गुरु समर्थ रामदास के चरणों में मुकुट रख दिया था। इस बयान के सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया और कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ बताते हुए आपत्ति जताई।
इस मुद्दे पर पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने शास्त्री पर तीखा हमला बोला और उन्हें इतिहास के प्रति अज्ञानता फैलाने वाला बताया। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगाई जानी चाहिए। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास को बदलने की साजिश करार दिया और भाजपा नेताओं से भी इस पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार से शिवाजी महाराज का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे उनके जीवन से जुड़ी एक प्रेरणादायक कथा के माध्यम से जिम्मेदारी और सेवा का संदेश देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि “मैं अपने सपने में भी छत्रपति शिवाजी महाराज की आलोचना या अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
इस पूरे घटनाक्रम पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इतिहास के प्रमाणिक स्रोतों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदारी से बयान देने की अपील की।
इसके अलावा, शास्त्री ने अपने “चार बच्चे पैदा करो, एक आरएसएस को दो” वाले बयान पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका आशय बच्चों को राष्ट्रवादी और सनातनी विचारधारा से जोड़ने का था, न कि किसी संगठन को सौंपने का। उन्होंने यह भी कहा कि वे भविष्य में विवाह कर परिवार बसाने का विचार रखते हैं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।


