लखनऊ
गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र स्थित कटरिया गांव में नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “बयान बदलवाने से सच नहीं बदलता” और आरोप लगाया कि प्रदेश में पीड़ित परिवारों पर दबाव डालकर सच्चाई दबाने की कोशिश की जा रही है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश ने इतना कमजोर मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा, जो अत्याचार के शिकार गरीब और बेबस लोगों पर दबाव बनवाकर उनके बयान बदलवाने का काम कर रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई, पीड़ित परिवार को लगातार प्रताड़ित क्यों किया जा रहा है और पुलिस पर पथराव करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवालिया निशान खड़े किए और कहा कि गांव के लोगों को जमीनी सच्चाई मालूम है।
इस बीच प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कटरिया गांव में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत 30 अप्रैल तक बाहरी लोगों के प्रवेश, धरना-प्रदर्शन, जुलूस और कैंडल मार्च पर रोक लगा दी गई है। पुलिस ने 22 अप्रैल को सपा प्रतिनिधिमंडल और ग्रामीणों के बीच हुए पथराव मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अखिलेश यादव ने इस घटना की तुलना हाथरस कांड से करते हुए कहा कि दोनों ही मामलों में पीड़ित परिवार सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग से थे और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “पीडीए समाज” के खिलाफ हो रहे अन्याय के चलते प्रदेश में आक्रोश बढ़ रहा है और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इलाके में पुलिस बल तैनात है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।


