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Sunday, April 26, 2026

आम आदमी पार्टी में संभावित टूट की आहट, पंजाब के विधायकों पर नजर

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सिसोदिया-संजय सिंह को डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में एक बार फिर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है और पंजाब इकाई में संभावित टूट की आशंका ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के हालिया बयानों और पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि पंजाब के कई विधायक पाला बदल सकते हैं। इसी बीच पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, गुजरात दौरे के बीच से लौटे वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में केजरीवाल के साथ अहम बैठक की, जिसमें पार्टी को संभावित नुकसान से बचाने की रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद सिसोदिया को पंजाब और संजय सिंह को दिल्ली में डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने अपने विधायकों और सांसदों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध संपर्क की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को देने के निर्देश भी जारी किए हैं।
दरअसल, चड्ढा के बयान में “कुछ बड़ा होने” के संकेत के बाद पार्टी अब सतर्क हो गई है। पहले इन बयानों को गंभीरता से नहीं लिया गया था, लेकिन अब पाला बदलने के बाद उनके द्वारा विधायकों से संपर्क में होने के दावे ने चिंता और बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि पंजाब के 63 से अधिक विधायक उनके संपर्क में हो सकते हैं, जो पार्टी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंजाब में कुछ विधायक लंबे समय से असंतुष्ट चल रहे हैं, जिनमें मंत्री पद न मिलने या अन्य कारणों से नाराजगी है। इनमें वे विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं जो पहले कांग्रेस या शिरोमणि अकाली दल से आम आदमी पार्टी में आए थे और अब उन्हें “कमजोर कड़ी” के रूप में देखा जा रहा है। माझा और मालवा क्षेत्र के कुछ विधायकों पर भी नजर रखी जा रही है।
वहीं, हरियाणा के पूर्व नेता नवीन जयहिंद ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में करीब 28 विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है। हालांकि आम आदमी पार्टी नेतृत्व इन दावों को खारिज कर रहा है। संजय सिंह ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए कहा है कि भाजपा और पार्टी छोड़ने वाले नेता जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में पार्टी के खिलाफ कोई माहौल नहीं है, बल्कि विश्वासघात करने वाले नेताओं के खिलाफ लोगों में आक्रोश है। फिलहाल, आम आदमी पार्टी नेतृत्व पूरी तरह अलर्ट मोड में है और पंजाब में अपनी सरकार व संगठन को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

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