✓सिक्योरिटी अमाउंट के नाम पर वसूली
✓ टैक्स चोरी के आरोप
✓ मानकविहीन बिल्डिंग और फीस में अपारदर्शिता
✓ निजी कोचिंग सेंटरों पर गंभीर सवाल
फरीदाबाद / पलवल | संवाददाता: जिले में संचालित कुछ निजी कोचिंग सेंटरों के खिलाफ अभिभावकों और छात्रों द्वारा गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में कोचिंग संचालकों पर मनमानी शुल्क वसूली, अवैध सिक्योरिटी अमाउंट लेने और मानकों की अनदेखी करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से शिकायत की गई है, जिस पर अधिकारियों ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी कोचिंग सेंटर छात्रों से एडमिशन के समय फीस के अलावा अलग से “सिक्योरिटी अमाउंट” के नाम पर मोटी रकम जमा करवा रहे हैं। आरोप है कि इस राशि को लेकर न तो कोई स्पष्ट लिखित नियम दिए जाते हैं और न ही समय पर इसकी वापसी सुनिश्चित की जाती है। इससे छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है।
इसके अलावा, कई कोचिंग सेंटर मानकविहीन इमारतों में संचालित हो रहे हैं। संकरी जगहों में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाया जा रहा है, जहां ना तो पर्याप्त वेंटिलेशन है और ना ही सुरक्षा के जरूरी इंतजाम। फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जो किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कुछ कोचिंग संस्थान फीस वसूली में पारदर्शिता नहीं रखते। कई बार फीस कर्मचारियों के व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर करवाई जाती है या किसी अन्य क्यू आर कोड के माध्यम से ली जाती है, जिससे लेन-देन का सही रिकॉर्ड नहीं बन पाता। वहीं, कर्मचारियों को वेतन नकद में दिए जाने की भी बात सामने आई है, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।
टैक्स और जीएसटी से जुड़े मामलों में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ संस्थान वास्तविक छात्र संख्या को कम दिखाकर अपनी आय छिपाने का प्रयास करते हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान होता है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि प्राप्त शिकायतों की जांच की जाएगी और यदि कोई भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि कोचिंग सेंटरों की भौतिक जांच कर सुरक्षा मानकों और वित्तीय प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर इस तरह की अनियमितताएं न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे में समय रहते सख्त कार्रवाई होना बेहद जरूरी है।


