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Sunday, October 11, 2026

हड़ताल के बीच लगा मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला, शमशाबाद में मरीजों को मिलीं दवाएं

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फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए राहत का माध्यम बन रही है। जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रविवार को शमशाबाद क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आरोग्य स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान इलाज और चिकित्सीय परामर्श के लिए मरीजों की भीड़ पहुंची। खांसी, जुकाम, बुखार समेत कई तरह की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की जांच कर उन्हें चिकित्सीय सलाह दी गई और जरूरत के अनुसार दवाइयां वितरित की गईं।
फैजबाग स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक डॉ. अमित कुमार की मौजूदगी में स्वास्थ्य मेला आयोजित किया गया। यहां फार्मासिस्ट बीरेंद्र राजपूत ने मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं। वहीं, एएनएम रूपम चतुर्वेदी ने महिलाओं को स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारियां दीं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया।
हालांकि, मेले में स्वास्थ्य कर्मचारियों की कम उपस्थिति भी देखने को मिली। बताया गया कि चिकित्सक, फार्मासिस्ट और एएनएम के अलावा अन्य कर्मचारी केंद्र पर मौजूद नहीं थे। जानकारी करने पर पता चला कि शेष स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल के चलते ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। ऐसे में सीमित कर्मचारियों के बीच ही मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
इसी तरह पसियापुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया। यहां फार्मासिस्ट शैलेन्द्र कुमार ने मरीजों का पंजीकरण कर उन्हें आवश्यक दवाइयां दीं। उनके मुताबिक, शिविर में खांसी-जुकाम, बुखार और दाद-खाज-खुजली जैसी समस्याओं से पीड़ित करीब 50 मरीज पहुंचे। उन्होंने मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराने के साथ जरूरी चिकित्सीय परामर्श भी दिया।
फार्मासिस्ट शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि हड़ताल के कारण वार्ड बॉय राजा को छोड़कर अन्य कर्मचारी शिविर में नहीं पहुंचे। इसके बावजूद मरीजों को उपलब्ध संसाधनों के जरिए स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास किया गया।
कुल मिलाकर, स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल का असर आरोग्य स्वास्थ्य मेले की व्यवस्थाओं पर दिखाई दिया, लेकिन फैजबाग और पसियापुर समेत विभिन्न केंद्रों पर मौजूद चिकित्सकों और फार्मासिस्टों ने जिम्मेदारी संभाली। सीमित कर्मचारियों के बीच मरीजों को परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं, जिससे स्वास्थ्य मेले का संचालन जारी रहा।

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