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Wednesday, August 19, 2026
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संपादकीय

आस्था की आज़ादी बनाम कानून की सीमा, कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्यों खींची स्पष्ट रेखा

शरद कटियार कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा ईद पर पशुओं की कुर्बानी को इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा न मानने संबंधी टिप्पणी ने देशभर में संवैधानिक...

सोशल मीडिया का अंधेरा सच और बिकती हुई जनभावनाएं

  भारत तेजी से डिजिटल समाज में बदल रहा है। गांव से लेकर महानगर तक अब मोबाइल स्क्रीन ही सूचना, विचार और बहस का सबसे...

युवा अपमान की राजनीति और उबलता भारत

शरद कटियार भारत दुनिया का सबसे युवा देश कहलाता है। आंकड़े बताते हैं कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु...

ओडीओपी से ओडीओसी तक बदलती विकास की नई परिभाषा

शरद कटियार भारत में आत्मनिर्भरता की चर्चा नई नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह केवल नारा नहीं, बल्कि विकास की एक व्यापक आर्थिक...

नीट से लेकर सुनार समाज तक: क्या जनता का भरोसा टूट रहा है?

  देश इस समय दो ऐसे मुद्दों से जूझ रहा है, जिनका असर सीधे करोड़ों लोगों के भविष्य और आजीविका पर पड़ रहा है। एक...

एंटी इनकम्बेंसी की आंधी या “सख्त सरकार” का असर?

- विरोध के बीच भी बीजेपी से खुश दिख रहा आम जनमानस - केवल सिटिंग से विरोध आ रहा सामने - बीजेपी नें टिकटें बदल दीं...

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