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Sunday, August 30, 2026

भैंस ने दिया दो सिर वाले बच्चे को जन्म, देखने के लिए उमड़ा ग्रामीणों का हुजूम

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क्रासर
एक धड़ और दो सिर देखकर दंग रह गए लोग, दोनों सिरों पर नहीं थीं आंखें; जन्म के कुछ ही देर बाद नवजात की मौत
शमशाबाद, फर्रुखाबाद। शमशाबाद थाना क्षेत्र के कुइया खेड़ा गांव में शनिवार सुबह उस समय कौतूहल का माहौल बन गया, जब किसान अंकित गंगवार की भैंस ने एक असामान्य बच्चे को जन्म दिया। नवजात की शारीरिक बनावट देखकर परिजन ही नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचे ग्रामीण भी हैरान रह गए। बच्चे का धड़ एक था, जबकि गर्दन के ऊपर दो सिर दिखाई दे रहे थे। दोनों सिरों पर आंखें नहीं थीं।
बताया गया कि भैंस को शुक्रवार देर रात करीब तीन बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। काफी समय बीतने के बाद भी प्रसव नहीं होने पर परिवार के लोग चिंतित हो गए। इसके बाद शनिवार सुबह ग्रामीणों की मदद से पशु चिकित्सक को मौके पर बुलाया गया। चिकित्सक ने काफी प्रयास के बाद भैंस का सुरक्षित प्रसव कराया।
प्रसव के बाद जैसे ही बच्चा बाहर आया, उसकी असामान्य शारीरिक संरचना देखकर वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। एक ही धड़ से दो सिर जुड़े हुए थे और दोनों सिरों पर आंखें विकसित नहीं हुई थीं। ग्रामीणों में यह खबर तेजी से फैल गई और देखते ही देखते आसपास के लोग भी नवजात को देखने के लिए पहुंचने लगे।
हालांकि जन्म के कुछ ही मिनट बाद नवजात की मौत हो गई। राहत की बात यह रही कि प्रसव के दौरान भैंस की जान बच गई। पशु चिकित्सक के प्रयास से भैंस की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
गांव में दिनभर होती रही चर्चा
दो सिर वाले बच्चे के जन्म की खबर आसपास के गांवों में भी पहुंच गई। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण कुइया खेड़ा पहुंचने लगे। लोग असामान्य जन्म को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं करते नजर आए। कुछ लोगों ने इसे कुदरत का अनोखा रूप बताया तो कुछ लोग इसे दुर्लभ जैविक घटना मानते रहे।
बाद में मृत नवजात को गांव के बाहर गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। घटना के बाद से पूरे इलाके में इसी असामान्य जन्म की चर्चा बनी रही।
चिकित्सकीय रूप से दुर्लभ जन्मजात विकृति
पशु चिकित्सकों के अनुसार इस तरह की स्थिति बेहद दुर्लभ जन्मजात विकृति के कारण उत्पन्न हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान में दो सिर वाले जीवों की स्थिति को Dicephalus (डाइसिफेलस) या व्यापक रूप से Polycephaly (पॉलीसेफली) से जोड़ा जाता है। भ्रूण के विकास के दौरान होने वाली असामान्यताओं के चलते शरीर के कुछ अंग सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो पाते। ऐसे मामलों में नवजात का जीवित रहना भी बेहद कठिन माना जाता है।

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