लखनऊ
प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की सुनवाई में अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने आदेश जारी करते हुए उनके खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने को कहा है, जिसे पुलिस कमिश्नर लखनऊ के माध्यम से लागू किया जाएगा।
यह मामला लखनऊ और बहराइच के विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति से जुड़ा है, जिसमें एक संस्था ने लगभग 1.33 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया है। संस्था का कहना है कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में सप्लाई के बावजूद कई बार पत्राचार के बाद भी भुगतान नहीं किया गया, जिससे वह आर्थिक संकट में आ गई है।
मामले की सुनवाई मानवाधिकार आयोग में की जा रही है। पिछली सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों जिलों के बीएसए को 16 अप्रैल को उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। हालांकि बहराइच के बीएसए अवकाश पर होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके, जबकि लखनऊ के बीएसए बिना किसी वैध कारण के अनुपस्थित रहे।
आयोग की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता पक्ष के प्रतिनिधि उपस्थित हुए और उन्होंने बकाया भुगतान तथा प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया। वहीं बहराइच के खंड शिक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि यदि स्कूलों की सूची और वसूली योग्य राशि उपलब्ध कराई जाए तो भुगतान प्रक्रिया में सहयोग किया जा सकता है।
आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए निर्देश दिया है कि संबंधित स्कूलों की सूची और बकाया राशि का पूरा विवरण सात दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाए। साथ ही जिलाधिकारी बहराइच और पुलिस कमिश्नर लखनऊ को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई में दोनों बीएसए की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को निर्धारित की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और अनुपस्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और भविष्य में सख्त कार्रवाई जारी रह सकती है।


