शरद कटियार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में युवा अब केवल चुनावी भाषणों का हिस्सा नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक वर्ग बन चुका है। मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का युवा संवाद इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य की एक तस्वीर पेश करता है। मुख्यमंत्री ने सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, रोजगार, तकनीक, कानून-व्यवस्था और प्रदेश के बदलते आर्थिक ढांचे को युवाओं के सामने रखा। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि मंगलवार को 2,500 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे और अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का दावा है कि अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। ऐसे आंकड़े निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन रोजगार की वास्तविक तस्वीर केवल नियुक्ति पत्रों की संख्या से नहीं बनती। सवाल यह भी है कि कितने पदों पर नियमित भर्तियां हुईं, कितनी परीक्षाएं समय पर पूरी हुईं, कितने परिणाम बिना विवाद के घोषित हुए और कितने युवाओं को रोजगार के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ा। सरकारी नौकरी युवाओं की आकांक्षा का एक हिस्सा है; निजी क्षेत्र, स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की भर्ती व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। राजनीतिक मंच से ऐसे आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे हैं। लेकिन युवा वर्ग के लिए असली मुद्दा आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि ऐसी भर्ती व्यवस्था है जिसमें विज्ञापन से नियुक्ति तक हर चरण पारदर्शी हो, परीक्षा कैलेंडर का पालन हो, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगे और चयन प्रक्रिया पर किसी को सवाल उठाने का अवसर न मिले। सरकार चाहे किसी भी दल की हो, निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था लोकतंत्र में सरकार की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण आधार होती है।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में आए बदलाव का दावा किया। मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संदर्भ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय तक अपराध, सांप्रदायिक तनाव और पलायन जैसे मुद्दों की राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। सरकार का कहना है कि अब दंगे, कर्फ्यू और चोरी के वाहनों की कटाई जैसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है। इन दावों का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं, बल्कि अपराध के आधिकारिक आंकड़ों, मामलों की प्रकृति, सजा की दर और नागरिकों के अनुभव के आधार पर किया जाना चाहिए।
युवा संवाद का सबसे सकारात्मक पहलू मुख्यमंत्री का तकनीक को लेकर दिया गया संदेश है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में रोजगार की प्रकृति को बदलने वाले हैं। ऐसे समय में युवाओं को केवल सरकारी नौकरी की तैयारी तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षा व्यवस्था को उद्योग की जरूरतों से जोड़ना, व्यावहारिक कौशल विकसित करना और छोटे शहरों के युवाओं को नई तकनीक तक पहुंच उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है।
उत्तर प्रदेश के पास देश की सबसे बड़ी युवा आबादी और विशाल कार्यबल है। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी। यदि इस आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, सुरक्षित वातावरण और पर्याप्त रोजगार नहीं मिला तो जनसांख्यिकीय लाभांश अवसर के बजाय दबाव में बदल सकता है।
सरकार द्वारा निवेश, एक्सप्रेसवे, रैपिड रेल, औद्योगिक विकास, ओडीओपी और एमएसएमई की चर्चा भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। बड़े निवेश प्रस्ताव तभी सार्थक होंगे जब उनका वास्तविक असर जमीन पर दिखाई दे—नए उद्योग लगें, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले, छोटे उद्यमों को बाजार मिले और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ें।
राजनीतिक विमर्श में एक और बदलाव की जरूरत है। सत्ता पक्ष को अपनी उपलब्धियां बताने का अधिकार है और विपक्ष को सवाल पूछने का। लेकिन युवाओं के सामने राजनीतिक बहस यदि केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाने तक सीमित हो जाए तो मूल प्रश्न पीछे छूट जाते हैं। युवा जानना चाहता है कि अगले पांच या दस वर्षों में उसके लिए शिक्षा कैसी होगी, रोजगार कहां से आएगा, परीक्षा व्यवस्था कितनी भरोसेमंद होगी और तकनीकी बदलाव के दौर में वह दुनिया की प्रतिस्पर्धा में कहां खड़ा होगा।
मुख्यमंत्री का ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी केवल नारों से नहीं, बल्कि ईमानदार मेहनत, नवाचार, कानून के सम्मान और समाज के प्रति संवेदनशीलता से भी जुड़ी है। युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील जरूरी है, लेकिन सकारात्मकता का अर्थ सवाल पूछना छोड़ देना नहीं है। स्वस्थ लोकतंत्र में सवाल और समाधान दोनों साथ चलते हैं।
आज उत्तर प्रदेश के युवा के सामने अवसर भी हैं और चुनौतियां भी। सरकारों की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि वे इन अवसरों को कितने व्यापक रोजगार में बदल पाती हैं और चुनौतियों का सामना कितनी पारदर्शिता से करती हैं।
नियुक्ति पत्र किसी युवा के जीवन में महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकता है, लेकिन करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल केवल कुछ हजार नियुक्ति पत्रों से हल नहीं होगा। असली लक्ष्य ऐसा उत्तर प्रदेश होना चाहिए जहां सरकारी नौकरी पाने वाला युवा भी सम्मान के साथ आगे बढ़े और निजी क्षेत्र, कारोबार, खेती, तकनीक तथा स्वरोजगार में अवसर तलाशने वाला युवा भी उतने ही भरोसे के साथ अपना भविष्य बना सके।
युवा केवल भविष्य नहीं हैं,वे वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति हैं। इसलिए राजनीति का केंद्र भी घोषणाओं से आगे बढ़कर उनके वास्तविक भविष्य पर होना चाहिए।


