देशभर में बड़े स्तर पर आयोजन, लाखों लोग अभियान से जुड़े
नई दिल्ली। आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 11वां आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष इसका मुख्य आयोजन नागपुर, महाराष्ट्र में होगा। कार्यक्रम की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” रखी गई है।
आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में देशभर में आयुर्वेद दिवस को एक व्यापक स्वास्थ्य-जागरूकता अभियान के रूप में आयोजित किया जा रहा है। उपलब्ध अभियान आंकड़ों के अनुसार 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 9,700 से अधिक गतिविधियां आयोजित की गई हैं। अभियान से 3.6 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है, जबकि करीब 89.3 लाख नागरिक आयुर्वेद शपथ ले चुके हैं। विदेशों में भी 1,900 से अधिक लोगों की भागीदारी दर्ज की गई है।
भारत सरकार ने मार्च 2025 में राजपत्र अधिसूचना जारी कर 23 सितंबर को हर वर्ष आयुर्वेद दिवस मनाने की निश्चित तारीख तय की थी। इससे पहले आयुर्वेद दिवस धनतेरस के अवसर पर मनाया जाता था, जिसकी तारीख हर साल बदलती थी। 23 सितंबर को चुनने के पीछे शरद विषुव का संदर्भ भी दिया गया है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं और इसे संतुलन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष का अभियान आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा को आधुनिक शोध, गुणवत्ता मानकों और समकालीन स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने पर केंद्रित है। सरकार आयुर्वेद दिवस को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और जन-जागरूकता से जोड़कर व्यापक स्तर पर आयोजित कर रही है।


