ढाका: बांग्लादेश (Bangladesh) में 35 साल बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव (presidential election) सम्पन्न होकर उसका रिजल्ट भी आ गया। BNP ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) को और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने ओली अहमद को मैदान में उतारा। मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर विपक्षी उम्मीदवार ओली अहमद को हराकर नए राष्ट्रपति (President) चुन लिए गए हैं।
मतदान आज गुरुवार को संसद यानी जातीय संसद में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे हुआ। बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से राष्ट्रपति पद को लेकर चल रही खींचातानी पर अब ब्रेक लग गया है। 349 रजिस्टर्ड सांसदों में से 343 ने मतदान किया, जबकि 6 सांसदों ने वोट नहीं दिया।
बांग्लादेश में 35 साल बाद हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के नतीजे आने के फलस्वरूप आलमगीर नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। इस्लाम आलमगीर को कुल 255 वोट मिले। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को सिर्फ 88 वोट हासिल हुए। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में शपथ लेंगे।
78 वर्षीय आलमगीर बांग्लादेश के 23वां राष्ट्रपति चुने गए। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीएनपी के महासचिव पद और पार्टी की राष्ट्रीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया था, जब सत्ताधारी BNP ने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया. तभी से उनका चुना जाना तय हो गया था।
छात्र राजनीति से अपनी यात्रा शुरू करने वाले मिर्जा फखरुल ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वो ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन में शामिल हुए थे। 1971 के मुक्ति संग्राम के समय उन्होंने भारत में शरण ली थी और वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन में अहम भूमिका निभाई थी।
राजनीति में आने से पहले वो सिविल सेवा में थे और 1972 से अर्थशास्त्र के टीचर रहे।1986 में सरकारी नौकरी छोड़कर वो मुख्यधारा की राजनीति में उतरे। इस्लाम आलमगीर की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत सीधे किसी बड़े राजनीतिक दल से नहीं हुई थी। मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राजनीति में कदम उस दौर में रखा, जब बांग्लादेश आजाद देश नहीं था और उसे पूर्वी पाकिस्तान के तौर पर जाना जाता था।


