यूथ इंडिया | फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद की पहचान मानी जाने वाली एशिया की सर्वाधिक राजस्व देने वाली सातनपुर आलू मंडी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क आज बदहाली, गड्ढों और अधूरे विकास की कहानी बयां कर रही है। आईटीआई चौराहे से सेंट्रल जेल चौराहे तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पूरा काम किसानों और आम जनता के साथ मजाक बनकर रह गया है।
जिस सड़क से प्रतिदिन हजारों किसान, व्यापारी और ट्रांसपोर्ट वाहन गुजरते हैं, उसी मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। चौड़ीकरण के नाम पर सड़क के दोनों किनारों पर काम जरूर दिख रहा है, लेकिन मुख्य मार्ग पूरी तरह जर्जर हालत में पड़ा है। हालत यह है कि वाहन चालक धूल, कीचड़ और टूटे रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस सड़क से जिले की अर्थव्यवस्था जुड़ी हो, जहां से करोड़ों रुपये का कारोबार होता हो, वहां गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है और केवल खानापूर्ति कर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है।
यह वही मार्ग है जहां सांसद मुकेश राजपूत का गोदाम स्थित है। इसी सड़क पर भोपत कोठा के पास विधायक अमृतपुर सुशील शाक्य का गेस्ट हाउस भी मौजूद है, जबकि यह क्षेत्र सदर विधायक सुनील दत्त द्विवेदी की विधानसभा में आता है। बावजूद इसके सड़क की दुर्दशा पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी लोगों को खल रही है।
किसानों का कहना है कि आलू मंडी तक फसल पहुंचाने में भारी दिक्कत हो रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और मालवाहक वाहन गड्ढों में फंस रहे हैं, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित कराया जाए। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर करोड़ों के राजस्व वाली मंडी की सड़क अगर ऐसी बदहाल रहेगी, तो किसानों और व्यापारियों को “डबल इंजन सरकार” के विकास मॉडल पर कैसे भरोसा होगा?


