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Friday, June 19, 2026

मोबाइल खरीदा, सोशल मीडिया पर आईडी बनाई और बन गए पत्रकार

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कथित पत्रकारों की बढ़ती फौज से लोग परेशान

प्रशांत कटियार

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में कुछ लोगों ने इसकी गंभीरता को मजाक बनाकर रख दिया है। आज हालात यह हैं कि मोबाइल फोन खरीदा, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर एक पेज बना लिया, फिर दो चार वीडियो डालकर अपने नाम के आगे पत्रकार, संपादक, ब्यूरो चीफ या मीडिया प्रभारी लिख लिया। इसके बाद दिनभर लाइक, कमेंट और शेयर की अपील करते हुए खुद को बड़े पत्रकार के रूप में पेश किया जाता है।

हैरानी की बात यह है कि कथित पत्रकारों की इस भीड़ में कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो अपना परिचय तक शुद्ध हिंदी में लिखने में असहज नजर आते हैं, लेकिन बड़े बड़े मीडिया पदों का दावा करते हैं। पत्रकारिता के मूल सिद्धांत, भाषा का ज्ञान, तथ्यों की पड़ताल और खबर की समझ से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं होता, फिर भी वे खुद को समाज का सबसे बड़ा प्रहरी साबित करने में लगे रहते हैं।
ऐसे कथित पत्रकारों का मुख्य उद्देश्य खबरों से ज्यादा सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दिखाना होता है। कई लोग हर छोटी बड़ी घटना का वीडियो बनाकर वायरल करने की कोशिश करते हैं और लाइक, कमेंट तथा फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में लगे रहते हैं। कुछ लोग तो सुबह से शाम तक मेरी पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें लिखने में ही व्यस्त दिखाई देते हैं।
लोगों का आरोप है कि कुछ कथित पत्रकार पत्रकारिता की आड़ में दबाव बनाने और निजी लाभ लेने की कोशिश भी करते हैं। कैमरा और माइक लेकर पहुंच जाना, फिर खबर चलाने या सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देना आम शिकायत बनती जा रही है। कई व्यापारियों और आम नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों की गोपनीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वसूली, दबावबाजी और प्रभाव जमाने की असलियत भी सामने आ सकती है।
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि पत्रकारिता केवल वीडियो रिकॉर्ड करने, फेसबुक लाइव करने या लाइक कमेंट जुटाने का नाम नहीं है। पत्रकारिता तथ्यों की पड़ताल, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनहित के मुद्दों को जिम्मेदारी के साथ उठाने का कार्य है। लेकिन कुछ लोग सोशल मीडिया की चमक दमक में पत्रकारिता की मूल भावना को पीछे छोड़ चुके हैं।समाज के बुद्धिजीवियों का कहना है कि असली और कथित पत्रकारों के बीच अंतर करना समय की जरूरत है। पत्रकारिता की आड़ में निजी स्वार्थ साधने वालों पर अंकुश लगेगा तभी इस सम्मानित पेशे की गरिमा और जनता का विश्वास सुरक्षित रह सकेगा।

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