(मनोज कुमार अग्रवाल -विभूति फीचर्स)
हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ऊर्जा संकट के इस दौर में ऊर्जा सुरक्षा के संयमित उपयोग के कर्तव्य बोध के प्रति जागरूक किया है। पीएम की इस सात सूत्री अपील में न सिर्फ आम जन के बीच संकट की हालत में मनोबल और विश्वास बने रहने की प्रेरणा है साथ ही संकट से निपटने का मूलमंत्र भी है। सरकार वैश्विक संकट के इस दौर में नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच बनकर डटी रही। आयातित तेल पर भारी दाम वृद्धि को सरकार ने 24 से 30 रूपये प्रति लीटर भार वहन किया,पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रूपये से घटा कर तीन रूपये लीटर कर दिया जबकि डीजल पर उत्पाद शुल्क खत्म कर दिया है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के अवरुद्ध होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने में भारत सरकार का कुशल प्रबंधन दुनिया के प्रभावित देशों के लिए एक मिसाल बन गया है लेकिन मौजूदा समय में अमेरिका और इजराइल-ईरान के बीच जो हालात बने हैं उनसे ऐसा प्रतीत होता है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट मार्ग निर्बाध खुलने की संभावना नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकीर्ण मार्ग है, जिससे भारत अपनी 90 फ़ीसदी से अधिक एलपीजी और लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में, जब दुनिया भर में ईंधन की भारी कमी और कीमतों में आग लगने का अंदेशा था, भारत सरकार ने दूरदर्शिता, कूटनीतिक कुशलता और त्वरित रणनीतिक निर्णयों से देश में ऊर्जा की सुव्यवस्था बनाए रखी बल्कि आम जनता पर बढ़ी कीमतों का भार भी नहीं बढने दिया।
संकट का संकेत मिलते ही भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के विजन को क्रियान्वित करते हुए न केवल वैकल्पिक स्रोत तलाशे बल्कि घरेलू संसाधनों को भी मजबूत किया। स्पेन, मिस्र,श्रीलंका,दक्षिण कोरिया फिलीपींस,जापान,पाकिस्तान,बांग्लादेश आदि में वहां की सरकारों ने ईंधन राशनिंग, वर्क फ्रॉम होम, फ्यूल पास, स्कूल बंद जैसे अनेक प्रतिबंध भरे कदम उठाए लेकिन भारत सरकार की सूझ-बूझ और प्लानिंग के चलते ईंधन राशनिंग नहीं हुई, स्कूल बसों, वाहनों व परिवहन यातायात की गाड़ियों को मांग के अनुरूप फ्यूल मिलते रहने से कोई स्कूल बंदी नहीं हुई और न ही कोई दफ्तर बन्द करने पड़े। तमाम दफ्तर सामान्य तौर पर कार्यरत रहे जिससे कोई वर्क-फ्रॉम-होम निर्देश पारित करने की नौबत नहीं आने पायी। देश भर में खुदरा ईंधन की स्थिर आपूर्ति बनाये रखी गयी। यह सब त्वरित सरकारी हस्तक्षेप से संभव हो पाया है। एलपीजी और घरेलू आपूर्ति संरक्षण व्यवधान के 8 दिनों के भीतर सरकार ने एलपीजी नियंत्रण आदेश जारी किया। रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया गया। घरेलू एलपीजी उत्पादन को 36,000 टन प्रति दिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया जो लगभग 50 फीसद की वृद्धि है। 9 दिनों के भीतर प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश जारी किया गया। पीएनजी घरेलू उपभोक्ताओं और सीएनजी सार्वजनिक परिवहन को 100 फीसद आवंटन के साथ संरक्षित किया गया।
सरकार द्वारा सार्वजनिक आपूर्ति बनाए रखने के लिए औद्योगिक आवंटन को भी सुचारू और युक्तिसंगत बनाए रखा। भारत सरकार द्वारा रूस, संयुक्त राज्य अमरीका, पश्चिम बंगाल, अफ्रीका, अटलांटिक बेसिन से त्वरित संपर्क स्थापित कर ईंधन आपूर्ति की व्यवस्था की गयी। भारत में एलपीजी की मांग लगभग 90,000 टन प्रतिदिन की है जिसे वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के माध्यम से 70 से 75000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार द्वारा आठ लाख टन कार्गो पहले ही सुरक्षित किये जा चुके हैं जिससे आज हमारे पास चालीस दिनों का अग्रिम भंडार उपलब्ध है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था। इस कठिन समय में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा की गई पहल के तहत, सरकार ने पनामा नहर जैसे वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करते हुए अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और पश्चिम अफ्रीका से तेल और गैस आयात के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने पश्चिम एशियाई देशों, विशेषकर सऊदी अरब, यूएई और ईरान के साथ निरंतर कूटनीतिक संवाद बनाए रखा, इसके चलते होर्मुज संकट के बावजूद भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनी रहे। भारत की कूटनीतिक सक्रियता का ही परिणाम था कि ईरान ने सशर्त रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर सहमति व्यक्त की, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में पूरी तरह से ठहराव की स्थिति टल गई।
सरकार को देश की प्रगति यानी जीडीपी की रफ्तार की गति बनाये रखने के लिए किसी दीर्घकालिक रणनीति के अवलम्बन की आवश्यकता होगी। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा, विदेशी मुद्रा और आर्थिक संकट से निपटने के लिए देशवासियों से कई महत्वपूर्ण अपील कीं।मौजूदा संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने कई मुख्य सुझाव दिए हैं । पीएम ने नागरिकों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो) या इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने को कहा।
विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए, पीएम ने देशवासियों से कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की। उन्होंने कोरोनाकाल की तरह ही ‘वर्क फ्रॉम होम’ की व्यवस्था फिर से अपनाने को कहा, ताकि यात्रा कम हो और ईंधन बचे। पीएम ने विदेशी छुट्टियों और शादियों में जाने के बजाय स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का आह्वान किया, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो। उन्होंने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने को देशहित में “सच्ची देशभक्ति” बताया और कहा कि समाज को संकट के समय एकजुट होकर काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इशारा साफ है तेल कंपनियों को हो रहा आर्थिक नुकसान और सरकार का विदेशी मुद्रा का कम होता भंडार अब नागरिकों के समझदारी भरे दायित्व बोध को याद दिला रहा है। अब हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह ऊर्जा का संयमित उपयोग करें, अनावश्यक यात्रा से बचें,सार्वजनिक यातायात साधनों का उपयोग करें और सरकार का हर संभव सहयोग करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार रहें। यह न सिर्फ जरूरी है वरन देश के हर नागरिक को सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संकट से निपटने का संकल्प भी पैदा करने का प्रयास है। एक जननेता की एक अपील ही समूचे देश में जागरूकता और कर्तव्य बोध की लहर जगा सकती है,वहीं विदेशी मुद्रा को देश के बाहर जाने से रोकने के लिए सोना न खरीदने, विदेशी पर्यटन से बचने,विदेश यात्रा न करने और पेट्रोल डीजल का कम उपयोग करने की सलाह दी है। वर्तमान परिस्थितियों में इसमे देश का उज्जवल भविष्य छिपा है। सकारात्मक सोच से सकारात्मक परिणाम अवश्यंभावी है। (विभूति फीचर्स)
ऊर्जा संकट के समाधान का मूलमंत्र संयम, स्वदेशी और साझेदारी


