
– 2007 में निधन के बाद राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिशें सीमित रहीं
– उनके नाम के ट्रस्ट भी ख़त्म करने की पुरुजोर कोशिश
– भतीजी रचना सिंह और पूर्व राजनीतिक सलाहकार प्रो. एच.एन. शर्मा ने विरासत बचाने की उठाई आवाज
शरद कटियार
भारतीय राजनीति में वैचारिक दृढ़ता, बेबाकी और जनसरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को उनके राजनीतिक तेवरों के कारण ‘युवा तुर्क’ कहा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका जन्म 17 अप्रैल 1927 को बलिया के इब्राहिमपट्टी में हुआ और उन्होंने 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनका निधन 8 जुलाई 2007 को हुआ।
चंद्रशेखर के निधन को 19 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को लेकर अब परिवार के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। हाल के घटनाक्रम में उनकी भतीजी रचना सिंह ने बलिया स्थित जयप्रभा गेस्ट हाउस और चंद्रशेखर की स्मृतियों से जुड़ी संपत्तियों के संरक्षण को लेकर शासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। उनके अभियान को पूर्व प्रधानमंत्री के लंबे समय तक राजनीतिक सहयोगी रहे प्रो. एच.एन. शर्मा का समर्थन मिला है।
प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाला ‘युवा तुर्क’
चंद्रशेखर केवल कुछ महीनों के प्रधानमंत्री नहीं थे। वह 1977 से 1988 तक जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे और 1962 से लेकर 2004 तक अलग-अलग दौर में संसद के सदस्य रहे। प्रधानमंत्री कार्यालय के रिकॉर्ड में उनका संसदीय जीवन और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारियां दर्ज हैं।
उनकी पहचान ऐसी राजनीति से बनी जिसमें सत्ता से ज्यादा विचार और जनता के मुद्दे महत्वपूर्ण माने जाते थे। यही कारण था कि उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी और केंद्र सरकार ने सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया था।
चंद्रशेखर के दो पुत्र हैं । उनके बड़े बेटे नीरज शेखर बाद में सक्रिय राजनीति में आए, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे और 2019 में भाजपा में शामिल हो गए।
लेकिन अब विवाद का केंद्र राजनीतिक उत्तराधिकार से ज्यादा चंद्रशेखर से जुड़ी संस्थाओं, स्मृतियों और संपत्तियों के संरक्षण का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
रचना सिंह ने हाल में आरोप लगाया है कि बलिया के जयप्रभा गेस्ट हाउस पर अवैध कब्जे की कोशिश हुई और उद्घाटन से जुड़ा शिलापट्ट तक हटा दिया गया। उनके मुताबिक गेस्ट हाउस का निर्माण जयप्रकाश मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से सांसद निधि से कराया गया था और इसका उद्देश्य बलिया आने वाली महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना था। इसका उद्घाटन 23 मार्च 2003 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने किया था। लेकिन परिवार उसे भी खत्म कर दिया इंटरनेशनल पक्षी विहार का भी नाम मिटा दिया रही सही संपत्तियों को भी कब्जा करने के लिए दिन रात एक किये जा रहे हैं।
एच.एन. शर्मा बने विरासत के मुखर प्रहरी
चंद्रशेखर के पुराने सहयोगियों में शामिल प्रो. एच.एन. शर्मा लगातार उनके विचारों और राष्ट्रीय योगदान को सामने लाने का प्रयास करते रहे हैं। हाल की श्रद्धांजलि सामग्री में भी उन्हें चंद्रशेखर का दीर्घकालीन निकट सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यकाल में राजनीतिक सलाहकार बताया गया है।
यही वजह है कि आज चंद्रशेखर की विरासत को लेकर उठे विवाद में रचना सिंह और प्रो. एच.एन. शर्मा की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में है।
चंद्रशेखर की सबसे बड़ी विरासत उनकी जमीन-जायदाद नहीं बल्कि उनकी राजनीतिक सोच, लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता और जनपक्षधर राजनीति थी। आज जरूरत इस बात की है कि उनसे जुड़ी संस्थाओं और स्मारकों का संचालन पारदर्शी तरीके से हो तथा उनकी वैचारिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।
जिस नेता ने राजनीति में सत्ता से ज्यादा सिद्धांतों को महत्व दिया, उसके निधन के 19 साल बाद यदि उसकी विरासत को लेकर परिवार और सहयोगियों के बीच टकराव की नौबत है, तो यह केवल पारिवारिक विवाद नहीं,बल्कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की सार्वजनिक विरासत के संरक्षण का भी सवाल है।


