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Friday, February 27, 2026

कालजयी क्रांतिकारी हैं अमर शहीद चंद्रशेखर शेखर आजाद

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कायमगंज: राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम द्वारा शहीदे आजम चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) की जयंती पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उन्हें विश्व का कालजयी अग्निपुत्र क्रांतिकारी (The eternal Agniputra revolutionary) बताया। प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि देश को आजादी न तो बिना खड़ग बिना ढाल और न सत्य और अहिंसा के अर्थ हीन नारों से मिली।

भारत को आजादी चंद्रशेखर आजाद जैसे पराक्रमी शहीदों के अभूतपूर्व बलिदानों से प्राप्त हुई ।हमने शहीदों की चिताओं पर मेले लगाने की बात कही थी लेकिन मेले लगे नहीं और हम सियासी मजमों में भटक गए।

गीतकार पवन बाथम ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र के पतन का प्रमुख कारण बलिदानी सपूतों की उपेक्षा है ।आजादी के बाद जो आदर्श समाज के सामने आए उनसे युवा पीढ़ी दिशाहीन हो गई आज के नेताओं को देखकर लगता नहीं है कि इस देश की युवा पीढ़ी किसी उद्देश्य को लेकर बलिदान हुई होगी। देश की राजनीति युवाओं के समक्ष कोई आदर्श प्रस्तुत नहीं कर पाई और वे भ्रम और दिशाहीनता के दलदल में फंस गए।

प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला ने कहा कि क्रांतिकारियों की वीर गाथाएं अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम में शामिल की जाएं ।शिक्षा के साथ निरंतर हो रहे प्रयोगों से हालात बिगड़ रहे हैं। डॉ सुनीत सिद्धार्थ ने कहा कि देवी देवताओं के मंदिर मस्जिद तो सिर माथे लेकिन अब समय की पुकार है कि हर शहर, कस्बा और गांव में शहीदों के मंदिर भी बनवाए जाएं और इसके लिए सरकारों का मुंह देखने के बजाय समाज के समृद्ध विचारवान लोगों को आगे आना चाहिए।

युवा कवि अनुपम मिश्रा ने कहा कि युवा रचेंगे देश का अब एक नया विधान। राष्ट्र करे समवेत हो वीरों का सम्मान। छात्र यशवर्धन ने कहा कि मातृभूमि की वेदिका पर जो हुए शहीद। मने उन्हीं की याद में अब होली और ईद। गोष्ठी में जेपी दुबे , वीएस तिवारी, मनीष गौड़ आदि ने प्रमुख रूप से सहभागिता की। अलीगंज से आए कवि बृजनंदन पुजारी ने शहीदों की शान में काव्य पाठ किया।

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