लंबी दूरी और संसाधनों की कमी पर उठे सवाल
फर्रुखाबाद
20 मई से प्रस्तावित जनगणना ड्यूटी को लेकर जनपद फर्रुखाबाद के शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। शिक्षकों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा ड्यूटी निर्धारण में उनकी परिस्थितियों और सुविधा का ध्यान नहीं रखा गया है, जिससे उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में कई शिक्षकों ने आपत्ति जताते हुए ड्यूटी व्यवस्था में संशोधन की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें उनके कार्यस्थल से काफी दूर के क्षेत्रों में ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया है, जबकि स्थानीय स्तर पर भी पर्याप्त विद्यालय और कर्मचारी उपलब्ध हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि ड्यूटी करने से उन्हें कोई परहेज नहीं है, लेकिन ऐसे क्षेत्रों में भेजा जाना जहां उन्हें भौगोलिक और सामाजिक जानकारी नहीं है, कार्य को कठिन बना देता है। यदि स्थानीय स्तर पर ही ड्यूटी लगाई जाती, तो कार्य अधिक सुचारु रूप से संपन्न हो सकता था।
इसके साथ ही, तकनीकी संसाधनों की कमी भी शिक्षकों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। जनगणना कार्य के लिए शासन द्वारा निर्धारित किया गया है कि कर्मचारियों के पास कम से कम 4GB रैम और एंड्रॉयड 12 या उससे ऊपर का स्मार्टफोन होना चाहिए, जबकि जिले के कई शिक्षकों के पास इस मानक के अनुरूप मोबाइल फोन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरी में नया फोन खरीदने की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
शिक्षकों ने यह भी मांग उठाई है कि जनगणना ड्यूटी के बदले उन्हें प्रतिकर अवकाश (कम्पन्सेटरी लीव) दिया जाए, जिससे वे अतिरिक्त कार्य के दबाव से राहत पा सकें। इसके अलावा, ड्यूटी आवंटन में असंतुलन को लेकर भी असंतोष है। नगर क्षेत्र के शिक्षकों को ग्रामीण इलाकों में और ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को शहर में तैनात किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण शिक्षकों का कहना है कि नगर क्षेत्र के शिक्षक पहले से ही मकान किराया भत्ता (HRA) प्राप्त कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें ही शहर क्षेत्र में ड्यूटी दी जानी चाहिए।
तहसील स्तर पर ड्यूटी निर्धारण में लापरवाही के आरोप लगाते हुए शिक्षकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाए और स्थानीय व व्यावहारिक आधार पर ड्यूटी का पुनर्निर्धारण किया जाए, ताकि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सके।


